भोगांतराय कर्म!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगांतराय कर्म:Obstructive Karma in the way of worldly enjoyments. अंतराय कर्म का एक भेद; जिस कर्म के उदय से जीव भोगने की इच्छा करता हुआ भी नहीं भोग पाता “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगांतराय कर्म:Obstructive Karma in the way of worldly enjoyments. अंतराय कर्म का एक भेद; जिस कर्म के उदय से जीव भोगने की इच्छा करता हुआ भी नहीं भोग पाता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूत – Bhuta. Demons, peripatetic deities: जो (व्यंतरों के ८ भेदों में एक भेद; इनके ७ भेद हैं) “
ग्रहाङ्ग A type of wish fulfilling trees (Kalpavrikshas). कल्पवृक्षों का एक भेद; जो आवश्यकतानुसार राजमहल , सभाग्रह आदि देते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्यग्राही ज्ञान – Bhavisyagrahi gyaana. Clairvoyance; to have knowledge of telepathic prediction; knowledge pertaining to whole fu- ture events. अवधिज्ञान, जिसके द्वारा भावी असंख्यातपर्याय – विशिष्ठ वस्तु का ज्ञान देखा जाता है “
”गिरिदारिणी” A divine power possessed by ‘Ravan’. रावण को प्राप्त एक विद्या ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्वीपसागर सिद्ध The soul who gets salvation from some island, ocean. द्वीप-सागर से मुक्त होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गिरिकूट A mountain of Bharat kshetra ( a region) near Eravati river. ऐरावत नदी के पास स्थित भरत क्षेत्र का एक पर्वत ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पूर्वांग – Poorvaanga. A particular long time period. काल का एक प्रमाण विशेष ” 84 लाख वर्ष प्रमाण काल “
उत्तरगुण Secondary virtues of saints. मूलगुणों के अतिरिक्त पाले जाने वाले गुण उततरगुण कहलाते हैं। जैसे-मुनियों के 84 लाख गुण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गतिगति-अगति(गुणस्थान प्राप्ति) Probability of getting any body form (Gati) after dying from one spiritual stage (Gunsthan). गुणस्थान से गति सामान्य अर्थात् किस गुणस्थान से मरकर जीव जिस गति में उत्पन्न हो सकता है और किसमें नहीं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]