षड् रस!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड् रस – Sadrasa. Six particular kinds of delicacies (milk, curd, ghee, oil, salt, sugar). 6 रस- दूध, दही, घी, तेल, नमक, मीठा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड् रस – Sadrasa. Six particular kinds of delicacies (milk, curd, ghee, oil, salt, sugar). 6 रस- दूध, दही, घी, तेल, नमक, मीठा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रासुक परित्याग- दया बुद्धि से साधुओं के द्वारा किये जाने वाले ज्ञान, दर्षन, चारित्र के दान का नाम प्रासुक परित्याग है। Prasuka parityaga- Preaching of right faith, right knowledge & right conduct by jaina saints
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्खंडागम टीका – Satkhandaagama Teekaa. The commentary books written on Shatkhandagam- 6 great scriptural parts. षट्खंडागम ग्रंथ के जीवट्ठान,खुद्दाबंध, बंधस्वामित्व विचय, वेदना, वर्गणा, महाबंध, in 6 खण्डों पर उपलब्ध अनेक टीकाएं ” छठे खण्ड पर वीरसेन स्वामी ने संक्षिप्त व्याख्या के अतिरिक्त और कोई टीका नही की है ” सर्वप्रथम परिकर्म नामक टीका आचार्य…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्यज्ञायक शरीर – Bhavyagnayaka Sarira. One who is going to be learned one in future. नो आगम द्रव्य का एक भेद; जो कर्म के स्वरूप को कहने वाले शास्त्र का जानने वाला आगे होगा वह भव्यज्ञायक शरीर कहलाता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेताम्बराभास – Shvetaambaraabhaasa. A sub-sect of Shvetambar Jain group. स्वेताम्बर संघ से उत्पन्न हुआ एक मत, अपरनाम ढूंढिया मत या स्थानकवासी मत “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधद्रव्य-कर्म परमाणुओं की संख्या जो बंधरुप हो। BandhaDravya- Aggregates of karmic molecules
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रोत्रिय – Shrotriya. One who has thoroughly studied the scriptures. श्रुत शास्त्र के जानने वाले श्रोत्रिय कहलाते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संयोजन – Sanyojan. The act of joining or mixing. A fault related to saint-food. मिलाना, आहार सम्बन्धी एक दोष “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैद्यसार –Vaidyasara Name of an Ayurvedic book written by AcharyaPujyapad. आचर्य पूज्यपाद (ई. श. ५) कृत आयुर्वेद विषयक एक संस्कृत ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुताज्ञान – Shrutaagyaana. False scriptural knowledge. मिथ्याश्रुतज्ञान; चौरशास्त्र, हिंसा शास्त्र तथा महाभारत, रामायण आदि के परमार्थ शून्य होने से साधन करने के अयोग्य उपदेश “