वार्तिकाकर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वार्तिकाकर्म – Vaartikaakarma.: Polishing or Varnishing. वस्तु तैयार करके उस पर पॅालिश आदि कर दी जाती है यही वार्तिक कर्म है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वार्तिकाकर्म – Vaartikaakarma.: Polishing or Varnishing. वस्तु तैयार करके उस पर पॅालिश आदि कर दी जाती है यही वार्तिक कर्म है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगवती आराधना – Bhagavati Aradhana. Name of a book written by Achrya Shivakoti. आचार्य शिवकोटि (ई,श. १ ) कृत एक ग्रंथ ” इसमें जैन साधुओं की चर्या एंव सल्लेखना विधि का विस्तार से वर्णन है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == जीवात्मा : == ववहारणयो भासदि, जीवो देहो य हवदि खलु इक्को। ण दु णिच्छयस्स जीवो, देहो य कदापि एकट्ठो।। —समयसार : २७ व्यवहार दृष्टि (नय) से जीव (आत्मा) और देह एक प्रतीत होते हैं किन्तु निश्चय दृष्टि से दोनों भिन्न हैं, कदापि एक नहीं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वायुमंडल – Vaayumandal.: Atmosphere, Environment. वायु का घेरा या मार्ग “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मसुन्दर :A disciple of Pandit Padmameru who wrote a book ‘Bhavishyadattacharit’. पंडित पद्ममेरू के शिष्य एवं भविष्यदत्त चरित के रचयिता ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == चोरी : == गुणा गौणत्वमायाति याति विद्या विडम्बनाम्। चौर्येणाकीर्तय: पुंसां शिरस्यादधते पदम्।। —ज्ञानार्णव : १२८ चोरी करने से गुण छुप जाते हैं, विद्या निकम्मी हो जाती है और बदनामी सिर पर चढ़कर बोलती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैशाली –Vaisali. Name of the maternal place of Lord Mahavira, the capital city of Sindhu country, ruled over by king Chetak, the maternal grandfather of Lord Mahavir. भगवन महावीर की ननिहाल ” दिगम्बर जैन ग्रंथो (उत्तरपुराण वीरजिणिन्दचरिउ, महावीर पुराण आदि) के अनुसार वैशाली नगरी सिंधु देश में थी, वहाँ के राजा चेटक…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुनारुक्त निग्रहस्थान – Punarukta Nigrahasthana. Repetition of the words having the same meaning (a fault). एक दोष; एक शब्द से जिस अर्थ की प्रतीति हो रही है उसी शब्द या अर्थ को पुनः कहना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मरथ: Past-birth name of Lord Anantnath, Name of a kind of Hastinapur. धातकीखण्ड में अरिष्ट नगरी का राजा था, अंत में सल्लेखना पूर्वक मरणकर अच्युत स्वर्ग में इंद्रपद प्राप्त किया, वह अनन्तनाथ भगवान का दूसरा पूवभव है इसी भव में उन्होंने तीर्थकर प्रकृति का बंध कया था । मुनि विष्णुकुमार के बडे़भाई हस्तिनापुर के…