चतुर्भावना!
चतुर्भावना Four types of emotions or sentiments. मैत्री, प्रमोद , कारुण्य , मध्यस्थ भावना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्भावना Four types of emotions or sentiments. मैत्री, प्रमोद , कारुण्य , मध्यस्थ भावना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यमा – Madhyama. A particular type of language (word – grouping) related to Jaina philosophy. भाषा; शब्दवर्गणारूप द्रव्य वचन ” शब्दाद्वैतवादी द्वारा माने गये वाणी के चार भेदों में एक भेद ; जो श्वासोच्छ्वास का उल्लंघन कर अनुकर्म से प्रवते॔, इसे जैनियों ने शब्द वर्गणारूप द्रव्य वचन कहा है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नमती – बीसवी सदी की एक प्रसिद्ध आर्यिका,जो गणिनी आर्यिका श्री ज्ञानमती माताजी की गृहस्थावस्था की मा थी।सन् 1924 मे इनका जन्म महमूदाबाद में हुआ, इन्होंने अपने विवाह में पिता से दहेज मे प्राप्त पùनंदी पंचविंषतिका ग्रथ का स्वघ्याय करके अपने जीवन को सुसंस्कृत किया। जिसके फलस्वरूप इनकी संन्तानो में भी त्याग के बीज…
चतुर्मासिक प्रतिक्रमण A type of penitence which is to be conducted after four months’ staying of a Jain rsaint in rainy season. प्रतिक्रमण का एक भेद ; चार-चार माह में किया जाने वाला प्रत्क्रमण ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम आराधना- Madhyama Aradhana. A type of adoration related to the spiritual development of soul at the path of salvation. भक्त प्रत्याखयान की वह आराधना जिस का पालन कर शरीर का त्याग करने वाले मुनिराज विशुद्ध लेश्या को धारण कर अनुत्रवासी देवों में उत्पन्न होतें हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नप्रभ – रूचक पर्वत का एक कूट Ratnaprabha- Name of a summit situated at Ruchak Mountain
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम अवगाहना – Madhyama Avagahana. A kind of occupancy. अवगाहना के तीन भेदों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगप्रतिक्रमक – पंचवर्शीय प्रतिक्रमण, 5 साल में सामूहिक रूप से साधुओ द्वार किया जाने वाला प्रतिक्रमण Yugapratikramana-A religious observance (repentance) to be performed by saints in every 5 year
चाँदखेड़ी(तीर्थ) Name of a Digambar Jain Atishay Kshetra in Jhalavad Dist. (Raj.) at the bank of river Rupli. The micraculous idol of Lord Rishabhdev is installed here. राजस्थान के झालावाड़ जिले में रूपाली नदी के तट पर अवस्थित एक दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र . यहाँ पर भगवान ऋषभदेव की चमत्कारिक प्रतिमा विराजमान है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]