भग्नघट श्रोता!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नघट श्रोता – Bhgnaghata Srota. A type of false listener. अपात्र श्रोता का एक भेद; फूटे घड़े की तरह होना जिसमें उपदेश नहीं ठहरता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भग्नघट श्रोता – Bhgnaghata Srota. A type of false listener. अपात्र श्रोता का एक भेद; फूटे घड़े की तरह होना जिसमें उपदेश नहीं ठहरता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रत्याख्यान – Vachan Pratyaakhyaana.: Utterance for not repeating something wrong. प्रत्याख्यान (त्याग) का एक भेद; में भविष्य में अपने व्रतों में अतिचार नहीं लगाऊंगा ऐसा बोलना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्प्राण – Nishpraana. Lifeless. निर्जीव अर्थात् जिसमें प्राण न हो “
दूर घ्राणत्व ऋद्धि A supernatural power of super-distantial attainment of smelling . जिस ऋद्धि के प्रभाव से साधु को घ्राण – इन्द्रिय के उत्कृष्ट विषय क्षेत्र से भी संख्यात योजन दूर स्थित गंध जानने की सामथ्र्य प्राप्त होती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्ता –Vaktaa: Orator , Speaker , Instructor ,One well –versed in scriptures . शास्त्रों का व्याख्याता ;सर्वज्ञ तीर्थंकर केवली .श्रुतकेवली और आरातीय आचार्य वक्ता के तीन भेद हैं ” सामान्य रूप से किसी भी भाषण करने वाले को भी वक्ता कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुवनकीर्ति – Bhuvanakirti. Disciple of Acharya Sakalkirti and preceptor of Gyanbhushan. नन्दिसंघ बलात्कार गण में आचार्य सकलकीर्ति के शिष्य व ज्ञानभूषण के गुरु (ई. १४४२-१४६८) “
दुषमा सुषमा काल Period of about one Korakori Sagar (a long period of crores of years) is called Dushama Sushama Kala i.e. period with misery and pleasure. अवसर्पिणी काल का चैथा और उत्सर्पिणी काल का तीसरा भेद। यह 42 हजार वर्ष कम एक कोडाकोडी सागर का होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वंदनमाला –Vandanmaalaa.: An auspicious article,garland of flowers(to be hung at a door). लौकिक मंगलों में एक मंगल :24 तीर्थंकर वन्दनीय होते हैं ,इसलिए भरत चक्रवर्ती ने 24 कलियों वाली वंदनमाला मुख्य दरवाजे पर लगवाई थी “वर्तमान में भी मंदिरों के दरवाजों पर वंदनमाला लगाने की परम्परा है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निषेध – Nishedha. Negation, negative element, prevention. प्रतिषेध, रोकना, प्रतिषेधक नियम “