स्वभाव दर्शन!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव दर्शन – Svabhaava Darssana. Self revealing perception. जो इन्द्रिय रहित और असहाय केवलज्ञान है वह स्वभाव दर्षन है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वभाव दर्शन – Svabhaava Darssana. Self revealing perception. जो इन्द्रिय रहित और असहाय केवलज्ञान है वह स्वभाव दर्षन है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनवासी देव – Bhavanavasi Deva. Residential celestial beings. चतुर्निकाय के देवों में प्रथम निकाय के देव, ये १० प्रकार के होते हैं “
जम्बूद्वीप- तीनों लोकों में मध्यलोक के अंदर असंख्यात द्वीप- समुद्रों में प्रथम द्वीप का नाम है – जम्बूद्वीप प्राचीन शास्त्रों में कही गई यह रचना हस्तिनापुर में पू० ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से सन् १९८५ में निर्मित हुई है । उसके दर्शन करने दुनिया भर से लोग हस्तिनापुर आते हैं । अथवा मध्यलोक का प्रथम…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वप्रत्यय उत्पाद – Svapratyaya Utpaada. Self origination caused due to increase & decrease in the property of non-gravity-levity.आत्मा मे अगुरुलधु गुणो की वृद्वि और हानि के निमित से होने वाला उत्पाद स्वप्रत्यय उत्पाद है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यश–Yash. Fame, name of a summit situated at Ruchak mountain. प्रसिद्धि, रुचक पर्वत पर स्थित एक कूट”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेषण – Visheshana. Adjective – a qualifying word. गुणवाचक शब्द, गुण, विशेषता ” वह शब्द जो किसी दूसरे शब्द की विशेषता प्रकट करता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वपक्षसाधक हेतु – Svapaksa Saadhaka Hetu. A motive for one’s own fulfillment.हेतु स्वपक्ष का साधक और पर पक्ष का दूषक होना चहिये अर्थात् अपने अभीष्ट अर्थ की सिद्वि करने वाला हेतू।
त्रिकालज्ञता To have unlimited knowledge of present, past and future. तीनों कालों का ज्ञान होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृषावाद–Mrashavaad. False word or utterance, Untruism, a False theory. असत्य कहना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख–Mukha. The fore–part, entrance, front, mouth, face. अग्रभाग, प्रवेश द्वार, प्रधान–मुख्य, धवला के अनुसार जीव प्रदेशो के विशिष्ट संस्थानों को मुख कहते है”