पेशी!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पेशी – Pashi. Muscles. औदारिक शरीर में पाई जाने वाली माँसपेशियाँ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पेशी – Pashi. Muscles. औदारिक शरीर में पाई जाने वाली माँसपेशियाँ “
जम्भाई Yawn (to stop yawning is a physical mortification). उबासी,अयनादि कायक्लेश का एक भेद ; जम्भाई , छींक आदि को रोकना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वकथा A sacred legend which inspires to move on the path of deliverance. मोक्षमार्ग में प्रेरित करने वाली कथा, अपरनाम धर्मकथा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशालप्रभ – Vishalaprabha. Name of the 10th Jaina – Lord of Videh Kshetra (region). विदेह क्षेत्र के १० वें तीर्थकर का नाम “
जगत्श्रेणी Length of universe, unit of 7 Rajus. ७ राजू प्रमाण लोकपंक्ति, एक प्रदेश चौड़े और ७ राजू लम्बे आकाश प्रदेशों की पंक्ति को जगत्श्रेणी कहते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मैथुन संज्ञा– Maithun Sangya. Sex instinct. 4 संज्ञाओ में एक संज्ञा; मैथुनरूप क्रियाओ में होने वाली इच्छा”
तत्वत्रयप्रकाशिका A commentary book in Sanskrit written by Bhattarak Shrutsagar. भट्टारक श्रुतसागर (ई. 1487.1499) कृत एक संस्कृत टीका (ज्ञानावर्णव ग्रंथ के गद्य भाग पर)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वार्थ – Sarvaartha. The great grand father of Lord Mahavira, One of the 14 earth under Chitra earth. भगवान महावीर के बाबा , चित्रा पृथिवी के नीचे चौदह अन्य पृथिवीयों में 12 वी पृथिवी ।
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == कायक्लेश : == सुखेन भावितं ज्ञाने, दु:खे जाते विनश्यति। तस्मात् यथाबलं योगी, आत्मानं दु:खै: भावयेत्।। —समणसुत्त : ४५३ सुखपूर्वक प्राप्त किया हुआ ज्ञान दु:ख के आने पर नष्ट हो जाता है। अत: योगी को अपनी शक्ति के अनुसार दु:खों के द्वारा अर्थात् कायक्लेशपूर्वक आत्म-चिन्तन करना चाहिए।