त्रिवर्ण!
त्रिवर्ण Three caste divisions (Kshatriya, Vaishya and Shudra). क्षत्रिय , वैश्य और शुद्र ये तीन वर्ण। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिवर्ण Three caste divisions (Kshatriya, Vaishya and Shudra). क्षत्रिय , वैश्य और शुद्र ये तीन वर्ण। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचनसार- आचार्य कुन्दकुन्द (ई. 127-179) कृत ज्ञान, ज्ञेत व चारित्र विशयक एक प्राकृत ग्रंथ। Pravacanasara- A prakrit treatise written by Acharya Kundkund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संरक्षणानंद – Sanraksanaananda. To worry for prosperity. रौद्रध्यान का एक भेद; धन के उपार्जन एवं संरक्षण आदि का चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोज्यता- प्रयोजन के वष, उपयोग में आने की योग्यता। Prayojyata –Applicability, aptness.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेयरत्नालंकार- आचार्य चारुकीर्ति (ई. 1544) कृत एक ग्रंथ। Prameyaratnalankara- A book written by acharyaCharukirti
दशकरण चूलिका A part or lesson of ‘Gommatsar-Karmakanda’ treatise. गोम्मटसार – कर्मकांड ग्रंथ का एक अध्याय , इसमें 10 कारणों का स्वरूप है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक शरीर वर्गणा- 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा; एक-एक जीव के एक-एक शरीर में उपचित (संचित) हुए कर्म-नोकर्मस्कंण्रुप वर्गणा। pratyeka sarira vargana – a type of aggregates of karmic molecules
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संमूर्च्छिम – Sammoorchchhima. Beings caused by spontaneous birth (not by womb or generation). गर्भज और उपपादज जन्म वालों के अतिरिक्त शेष जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण सप्तभड्गी- प्रमाण में प्रत्येक धर्म की अपेक्षा सप्तमभंगी होती है; स्यात् अस्ति, स्यात् नास्ति, स्यात् अस्ति नास्ति स्यात् अवक्तव्य, स्यात् अस्ति अवक्तच्य, स्यात् नास्ति अवक्तव्य, स्यात् अस्ति नास्ति अवक्तव्य ये सप्तभंगी कहलाते है। PramanaSaptabhangi- Measure pertaining to seven combinations (Saptbhangi)