झझावात!
झझावात Heavy rainy storm. जलवृष्टि सहित जो वायु बहती है उसे झांझावात कहते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
झझावात Heavy rainy storm. जलवृष्टि सहित जो वायु बहती है उसे झांझावात कहते हैं। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुजन पृच्छा आलोचना- आलोचना का एक दोा; आचार्य महाराज द्वारा दिये गये प्रायश्चित में अश्रद्धान करके वह योग्य है या अयोग्य ऐसा अन्य किसी से पूछना। Bahujana Prccha alocana- Disbelieving on the repentance given by an acharya (a fault)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लघिना ऋद्धि – विक्रिया ऋशि का एक भेद, जिस ऋशि के प्रभाव से साधु अपने षरीर को वायु से भी हल्का बनाने मेे समर्थ थे। Laghima Rdhhi-A type of super natural power pertaining to turning body lighter than air
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलहद्दचरिउ- बलभद्र चरित्र विायक एक ग्रंथ। Balahaddacariu- Name of a book
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिविधान व्रत – तीन वर्श तक हरे भादों माघ व चैत्र मास में कृ अमावस को एकासन 1 से तीन को तेला तथा 4 को एकासन करना एवं षीलव्रत पालते हुए ऊँ हीं महावीराय नम की त्रिकाल जाप करना। Labdhividhana Vrata-A particular type of fasting or vow
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बलभद्र- सुमेरु संबंधी नन्दन वन में स्थित एक प्रधान कूट व उसका स्वामी दव, सनत्कुमार स्वर्ग का 6ठां पअल व इन्द्रक, नारायण के बड़े भाई बलभद्र कहते है। Balabhadra- Name of a main summit and its ruling deity situated in nandan forest of Sumeru mountain name of the 6th patal (layer) & indra
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्यान्तराय कर्म –Viryamtaraya Karma. An obstructive Karma obscuring the vitality of beings of soul. जिस कर्म के उदय से आत्म वीर्य की रुकावट हो या जीव किसी कार्य के प्रति उत्साहित होने की इच्छा होते हुए भी उत्साहित नहीं हो पाता एवं असमर्थता का अनुभव करता हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बारह- 12; 12 अंग रुप श्रुतज्ञान, 12 अनुप्रेक्षा आदि। Baraha- Twelve (12 part of scriptural knowledge etc)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध राषि – प्राप्त की गई राषि। Labdha rasi-Gained amount or quantity of something
हुण्डावसर्पिणी काल- असंख्यात अवसर्विणी- उत्सर्पिणी काल की शलाकाओं के बीत जाने पर प्रसिद्ध एक हुण्डावसर्पिणी आती है उसके चिन्ह है- विकलेन्द्रिय जीवो की उत्पत्ति अधिक होती है। इस काल में कल्प वृक्षों का अन्त और कर्मभूमि का व्यापार प्रारम्भ हो जाता है चक्रवर्ती की विनयभंग 58 ही श्लाका पुरुष उत्पन्न होते है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]