प्रशस्त!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशस्त- शुभ, प्रषंसनी, हितकारी, जा कर्मो को निर्दहन करने की सामथर्य से युक्त है वह प्रशस्त है। श Prasasta- Auspicious, excellent, commended, one having capacity to destroy karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशस्त- शुभ, प्रषंसनी, हितकारी, जा कर्मो को निर्दहन करने की सामथर्य से युक्त है वह प्रशस्त है। श Prasasta- Auspicious, excellent, commended, one having capacity to destroy karmas
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतरव – Bhutarava. Name of a country won by Lavkush (Ram’s sons). एक देश, इसे लवकुश ने जीता था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवाद- जिसके द्वारा इश्ट अर्थे को उतमता से प्रतिपादित किया जाय, उसे प्रवा कहते है। Pravada- Discourse, right exposition
चल संख्या Variable number, a mathematical term. एक गणितीय पद, x,y,z तरह की संख्या ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यक्ष विनय- pratyaksa vinaya Paying reverence complelty to honourables मन, वचन व काय से गुरु आदि का विनय करना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य तप – Bahya Tapa. Austerity related to external things or activities. तप का एक भेद;अनशन , अवमौदर्य, वृत्तिपरिसंख्यान , रसपरि –त्याग, विवित्त्कशय्यासन और कायक्लेश छह प्रकार का है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यभिचार – Vyabhicara. Immoral character, adultery, Transgression, Violation. कुशील पाप से संबंधित चरित्रहीनता, अतिक्रमण, असंगति ,
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसमय वक्तव्यता – Svasamaya Vaktavyataa. Pertaining to spiritual meanings. वक्तव्यता के तीन भेदो मे एक भेद। जिस शास्त्र मे स्वसमय का ही वर्णन किया जाता है उसे स्वसमय वक्तव्य कहते है और उसके भाव को अर्थात् उसमे रहने वाली विषेषता को स्वसमय वक्तव्यता कहते है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धर्मास्तिकाय : == धर्मास्तिकायोऽरतो—ऽवर्णगन्धोऽशब्दोऽस्पर्श:। लोकावगाढ: स्पृष्ट:, पृथुलोऽसंख्यातिकप्रदेश:।। —समणसुत्त : ६३१ धर्मास्तिकाय रसरहित है, रूपरहित है, गंधरहित है और शब्दरहित है। समस्त लोकाकाश में व्याप्त है, अखण्ड है और विशाल है तथा असंख्यातप्रदेशी है। उदकम् यथा मत्स्यानां, गमनानुनुग्रहकरं भवति लोके। तथा जीवपुद्गलानां, धर्मद्रव्यं विजानीहि। —समणसुत्त : ६३२ जैसे इस…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शैवदर्शन – Shaivadarshana. Another name of Shuddhadvait, a doctrine of monism. शुद्धाद्वैत का अपरनाम “