परमार्थ बाह्म!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ बाह्म:Saint, who does not have the quality of differentiating self (Soul) & other.साधु जो भेदज्ञान न होने के कारण परमार्थ बाहय कहलाते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ बाह्म:Saint, who does not have the quality of differentiating self (Soul) & other.साधु जो भेदज्ञान न होने के कारण परमार्थ बाहय कहलाते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादृष्य प्रत्यभिज्ञान – Saadrsya Pratyabhijnnaana. Resemblance, similarity. स्मृति और प्रत्यक्ष के विषय भूत पदार्थों मे सादृश्यता दिखाते हुए जोड़ रुप ज्ञान का होना। जैसे यह गौ गवय के समान है।
देवमरण A part of first forest Bhadrashal of Sumeru mountain. सुमेरू पर्वत के प्रथम वन भद्रशाल का एक भाग। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातवीं पृथ्वी – Saataveen Prthivee. The 7th hellish earth. महातमः प्रभा नाम की नरक पृथिवी, यह 8 हजार योजन मोटी है। इस पृथिवी से एक राजु नीचे लोक का अंत है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विर्याचरण –Viryacarana Conduct according to the capability. सामथ्र्य के अनुसार आचार का पालन करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृगचारित– Mragcharit. Unrestrained saints (who make decisions by themselves). जो साधु अकेले ही स्वच्छंद रीती से विहार आदि करते है”
चरणानुयोग गृहमेध्यनगाराणां चारित्रोत्पत्तिवृद्धिरक्षाङ्गम्। चरणानुयोगसमयं सम्यग्ज्ञानं विजानाति।।४५।। अर्थ-सम्यग्ज्ञान ही गृहस्थ और मुनियों के चरित्र की उत्पत्ति, वृद्धि और रक्षा के अंगभूत चरणानुयोग शास्त्र को जानता है अर्थात् जिसमें श्रावक और मुनिधर्म का वर्णन किया जाता है, वह चरणानुयोग है। अथवा An Anuyog (a division of particular treatises) dealing with principles of conduct prescribed for the householders…
उभयाव्यतिरेकी That which refers to both extremes. हेतु का एक शब्द- अन्वयव्यतिरेकी जिसमें अन्वय दृष्टांत व व्यतिरेक दृष्टांत दोनों होते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हेलित – Helita. Pushing & jostling and mocking at others while paying reverence (an infraction). वंदना का एक देष-वंदना के समय दूसरों को धक्का आदि देना या उनकी हंसी आदि करनां “