पिंड प्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिंड प्रकृति – Pimda Prakrti. Group of Karmic nature having many subkinds. बहुत सारी प्रकृतियों का समुदाय. जिन प्रकृतियों के एक से अधिक भेद होते हैं, जैसे गति, जाति आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिंड प्रकृति – Pimda Prakrti. Group of Karmic nature having many subkinds. बहुत सारी प्रकृतियों का समुदाय. जिन प्रकृतियों के एक से अधिक भेद होते हैं, जैसे गति, जाति आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रयणसार – आचार्य कुन्दकुन्द कृत 167 प्राकृत भाशाओं में निबद्ध गं्रथ। Rayanasara-name of a treatise by Acharya Kund Kund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुसिद्धार्थ – Susiddhaartha. The spiritual teacher of the 9th Balbhadra Balram. 9वें बलभद्र बलराम के गुरू ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवनंजय – Bhavanamjaya. A city in the north of Vijayardha (mountain). विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लक्षण – किसी वस्तु की पहचान बताने वाला स्वरूप हेतू या चिन्ह को लक्षण कहते है। Laksana-Symptoms, Indication, Characteristics or distinguish feature
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गशलाका राशि – Vargashalaakaa Raashi.: Desired resultant quantity of Log2 Log2 (a mathematical operation). दो के वर्ग से लेकर जितनी बार की राशि विवक्षित हो उतनी वर्गशलाका राशि जानना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वस्थ (साधु) – Parsvastha (Sadhu). Saints not observing the duties of a saint life. इंद्रिय, कषाय और विषयों से पराजित होकर चरित्र को तृण के समान समझने वाले मुनि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोधर – भूतकालीत 19 वें तीर्थकर, मध्यम ग्रैवेयक का एक इन्द्रक विमान, मानुशोत्तर पर्वत के सौगन्धिक कूट का एक देव, एक राजा जिन्होने आटे के मुर्गे की बलि करके कई भवों तक दुर्गति के दुख उठाये। देखें – यषोधर चरित, आटे का मुर्गा आदि पुस्तकें। Yasodhara-Name of the 19th Tirthankar (Jaina-Lord) in the past…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरसेना – Varasenaa.: Name of the first chief Aryika (Ganini) in the holy assembly of Lord Vasupujya. भगवान वासुपूज्य के समवशरण में मुख्य आर्यिका (गणिनी) ” अपरनाम ,सेनार्या , सेना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यायचूलिका – Nyaayachoolikaa. Name of a book written by shri Aklanka Bhatt. श्री अकलंक भट्ट (ई. 640-680) कृत एक न्याय ग्रंथ “