प्रशमभाव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमभाव-पंचेन्द्रियों के विषयों में शिथिल मन का होना ही प्रशम भाव कहलाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमभाव-पंचेन्द्रियों के विषयों में शिथिल मन का होना ही प्रशम भाव कहलाता है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकीर्णक देव – Prakirnaka Deva. A type of deites (as common citizens). देवों के दश भेदों में से एक; जो देव प्रजा के समान होते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विलसित – Vilasita. Lustrous, Glamorous, Name of a deity of Asurkumar kind. जगमगाता हुआ, असुरकुमार जाति का एक भवनवासी देव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीलाभास – Neelaabhaas. Name of the 16th planet. 88 ग्रहों में 16 वें ग्रह का नाम “
त्रिगुणसार व्रत A country of Bharat kshetra in middle Arya Khand (region). क्रमशः 1,1,2,3,4,5,4,4,3,2,1 इस प्रकार 30 उपवास करना व णमोकार मंत्र का त्रिकाल जाप्य करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदुर – Vidura. The younger brother of Dhritrashtra- Pandu of kaurav dynasty. कौरववंशी धृतराष्ट्र – पाण्ङू का छोटा भाई ” पाण्ङवों के परम हितैषी, अंत में मुनि विश्वकीर्ति से मुनि दिक्षा ली ” लाक्षा ग्रह में विदुर द्वारा बनवाई गई सुरंग से ही निकलकर पाण्ङवों की प्राण रक्षा हुई “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीचपद उद्धार – Neechapada Uddhaara. Progressive life from the lower stage. निम्न कुल में जन्म लेकर भी धर्म के प्रभाव से आत्मा को सुसंस्कारित करना ” जैसे-यमपाल चांडाल ने अहिंसा धर्म का पालन कर देवपर्याय को प्राप्त किया था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभिगिरी – Nabhigiri Circular mountain at the center of Haimvata etc. areas भरत एरावत व विदेह छेत्र को छोड़कर शेष हेमवत आदि चार छेत्रों के मध्य भाग में गोल पर्वत ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == ज्ञाता : == ण हु सासणभत्ती—मेत्तएण सिद्धंतजाणओ होइ। ण वि जाणओ वि णियमा, पण्णवणाणिच्छिओ णामं।। —सन्मति तर्क् प्रकरण : ३-२६ मात्र आगम की भक्ति के बल पर ही कोई सिद्धान्त का ज्ञाता नहीं हो सकता और हर कोई सिद्धान्त का ज्ञाता भी निश्चित रूप से प्ररूपणा करने के…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निसृत – Nisrta Preception of an exposed thing. मतिज्ञान; सामने विद्यमान पूरी वस्तु को जानना “