मद्यमयी!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद्यमयी- Madyamayi. A part of circumference of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत की परिधि के सात भागों में एक भाग “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद्यमयी- Madyamayi. A part of circumference of Sumeru mountain. सुमेरु पर्वत की परिधि के सात भागों में एक भाग “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथकत्व वितर्क – Prthaktva Vitarka. First Shukla Dhyan (Absolute Meditation). पहला शुक्ल्ध्यान – यह आठवें से बारहवें गुणस्थान के कुछ भाग तक होता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मतिज्ञान- Matigyana. Sensory knowledge, perceptual cognition. 5 ज्ञानों में एक ज्ञान ;मन और इन्द्रिय की सहायता से उत्पन्न होने वाला ज्ञान “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == ममत्व : == ममता खट परै रगे, ओनीदे दिन रात। लेनो न देनो इन कथा, भोरे ही आपत जात।। —आनन्दघन ग्रंथावली :: पद : ३५ ममता नारी में यदि कोई गुण है तो वह है मोहित करने का। किन्तु वह स्वर्ण—कटार किस काम की, जिसका स्पर्श—मात्र प्राणान्त का…
गोशीर्ष A mountain of Bharat Kshetra in Arya Khand (region). भरत क्षेत्र आर्यखण्ड का मलयगिरी के निकट स्थित एक पर्वत ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मटि्य – Mattiya. Living beings like centipede having number of legs. बहुत पैर जिस के रहते हैं ऐसा जो ‘कनखजूरा’ जैसा प्राणी हैं , उसे मटि्य कहतेहैं “
चन्दन कथा A book written by Acharya Shubhchandra-5. आचार्य शुभचन्द्र -५ (ई. १५१६-१५५६) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समंतभद्र – Samantabhadra.Name of great Acharya, the writer of Svayambhu Stotra, Tattvanushasan, Ratnakarandashravaka-chr etc. many great treatises. आचार्य सिद्वसेन के उत्तरवर्ती एक आचार्य। स्वयम्भू स्तोत्र, स्तुति विद्या, देवागम स्तोत्र, युक्त्यानुशासन, तत्वानुशासन, जीवसिद्वि, प्राकृत व्याकरण, रत्नकरण्डश्राावकाचार आदि अनेक ग्रंथो के रचयिता संस्कृत कवि, वादी, वाग्मी, गमक, तार्किक आदि उपाधियो से समन्वित एक प्रसिद्व आचार्य।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरजा – Viraja. Name of the prime city in Nalin Kshetra (region) ‘of west videh (region), Name of a vapi (like large lake) situated in southern Nandishvardvip (is- land). अपर विदेह के नलिन क्षेत्र की प्रधान नगरी, नन्दीश्वर द्वीप की दक्षिण दिशा में स्थित वापी “
गृहिमूलगुणाष्टक 8 basic restraints of householders. गृहस्थ के ८ मूलगुण; ५ अनुव्रतों का पालन, मद्य, मांस, न्मधू का त्याग (रत्नकरण्ड के अनुसार)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]