ग्रहण विधि!
ग्रहण विधि Procedure of accepting vows. गुरु से व्रतों का उपदेश जानने के बाद उनसे व्रत ग्रहण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ग्रहण विधि Procedure of accepting vows. गुरु से व्रतों का उपदेश जानने के बाद उनसे व्रत ग्रहण करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
इत्वरिका परिगृहीतागमन Enjoying married woman. ब्रह्मचर्य अणुव्रत का एक अतिचार विवाहित व्यभिचारिणी स्त्री से हास्यादि संबंध रखना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आत्मलीनता Self absorbedness (engrossed in meditation). आत्म स्वरूप में लीन होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == जीव : == प्राणैश्चतुर्भिर्जीवति, जीविष्यति य खलु: जीवित: पूर्वम्। स जीव:, प्राणा:, पुनर्बलमिन्द्रियमायुरुच्छ्वास:।। —समणसुत्त : ६४५ जो चार प्राणों से वर्तमान में जीता है, भविष्य में जीयेगा और अतीत में जिया है, वह जीव द्रव्य है। प्राण चार हैं—बल, इन्द्रिय, आयु और उच्छ्वास। अणुगुरुदेहप्रमाण: उपसंहारप्रसप्र्पत: चेतयिता। असमवहत: व्यवहारात्,…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्राह्मण – Brahmana. A Hindu- caste, known by virtues and good activities. जैन धर्म के अनुसार भरत चक्रवर्ती द्वारा स्थापित वर्ण ” ये ब्रह्मसूत्र (यज्ञोपवीत) को धारण करते थे तथा अहिंसा आदि सदाचार को पालते थे “
दिगम्बर मुनि (साधु) Digambar saints, free from all worldly attachments. नग्न वसत्र आभूषण आदि समस्त परिग्रह रहित साधु जो इन्द्रिय विजयी 28 मूल गुणधारी होते हैं एवं जीवदया पालन हेतु मोर पंख की पिच्छी व शरीर शुद्धि हेतु जल के लिए काष्ठ का कमंडलु रखते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
इच्छापरिमाण Limitation of desires. परिग्रह परिमाण-इसमें स्वर्ण दास आदि बाह्य परिग्रह का परिमाण किया जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आस्रव Influx, Inflow of karmas. सात तत्वों में तीसरा तत्व , कर्मों के आगमन को आस्रव कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीधर्म – Shreedharma. Past-birth soul of Lord Munisuvrata. तीर्थंकर मुनिसुव्रत के पूर्व भव का जीव “