तत्वार्थाधिगम!
तत्वार्थाधिगम Knowledge of ascertained reals or truth. तत्वों के अथ्ज्र्ञ का ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
तत्वार्थाधिगम Knowledge of ascertained reals or truth. तत्वों के अथ्ज्र्ञ का ज्ञान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कर्म-मुक्ति : == पक्के फलम्हि पडिए, जह ण फलं बज्झए पुणो विंटे। जीवस्स कम्मभावे, पडिए ण पुणोदयमुवेइ।। —समयसार : १६८ जिस प्रकार पका हुआ फल गिर जाने के बाद पुन: वृन्त से नहीं लग सकता, उसी प्रकार कर्म भी आत्मा से विमुक्त होने के बाद पुन: आत्मा (वीतराग) को…
जघन्य प्रोषधोपवास A type of fasting (related to Ashtami, Chaturdashi). अष्टमी , चतुदशी को एकासन अथवा आचाम्ल निर्विकृति आहार करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
णमोंकार विधान Name of a Vidhan-procedural worshipping composition. आर्यिका श्री अभयमती माताजी (ई.श.20 उत्तरार्द्ध) एंव अन्य लेखकों द्वारा रचित णमोकार मंत्र के 35 अक्षरों पर आधारित एक पूजा विधान। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूल प्रायश्चित–Mula Prayshchit. A special punishment for a saint –Re-initiation. किसी दोष विशेष से युक्त साधु को पुनः दीक्षा देना मूल प्रायश्चित कहलाता है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सविपाक निर्जरा – Savipaaka Nirjaraa. Shedding off or dissociation of Karmas on maturity. निर्जरा के दो भेदों में एक भेद, कर्मो का अपने समय पर उदय में आकर झडना ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुमुक्षु : == मिच्छत्तासवदारं रुंभइ सम्मत्तदिढकवाडेण। हिंसादिदुवाराणि वि, दिढवयफलिहेहिं रुंभति।। —जयधवला : १-१०-५५ मुमुक्षु जीव सम्यक्त्व रूपी दृढ़ कपाटों से मिथ्यात्व रूपी आस्रव द्वार को रोकता है तथा दृढ़ व्रत रूपी कपाटों से हिंसा आदि द्वारों को रोकता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसपर्ण –Visarpana. Expansion, Crawling, Slight expansion of soul-points. फैलाव, प्रसारण, विस्तार, रेंगना, सरकाना, दीपक के प्रकाश के समान जीव के प्रदेशों का संकोच-विस्तार (विसपर्ण) होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वोपशम – Sarvopashama. Super subsidence (of Kamas). मिथ्यत्व आदि तीनो प्रकृतियों के उदयाभाव को सर्वोपशम कहते है। प्रथमोपशम सम्यक्त्व का लाभ भी सर्वोपशम से होता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरलन राशि – Viralana Rashi. Spreaded numbers in the form of 1. जिस संख्या को एक-एक करके फैला दिया जायें ” जैसे ४ का विरलन होगा १,१,१,१, “