श्रीकांत!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीकांत – Shreekaanta. Name of the 7th predestined Chakravarti (emperor). आगामी 7वें चक्रवर्ती “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीकांत – Shreekaanta. Name of the 7th predestined Chakravarti (emperor). आगामी 7वें चक्रवर्ती “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचित्त द्रव्य शल्य – Sachitta Dravya Shalya. A type of material sting; servants etc. animate objects. द्रव्य शल्य के तीन भेदों में एक भेद; दास आदि सचित्त द्रव्य शल्य है “
देशव्रती One observing the rules and regulation of a householder. देशसंयमी – श्रावक व्रतों को पालने वाला। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संवृत्त-विवृत्त – Sanvrtta-Vivrtta. A type of female genital organ with having some hidden & some opened portion. योनि के 9 भेदों में एक भेद; जो योनि स्थान कुछ ढका हुआ और कुछ खुला हुआ हो “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रद्धानाश्रद्धान – Shraddhaanaashraddhaana. Right belief and disbelief (caused due to the fruition of Samyagmithyatva Karma). सम्यग्मिथ्यात्व कर्म के उदय होने पर मिश्र गुणस्थान में पाए जाने वाले मिश्र परिणाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शोधन – Shodhana. The act of cleansing or purifying. संशोधन, शुद्ध करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रशमाभास- प्रषम भाव का झूठा अहंकार करने वाले मिथ्यादृशिट के सम्यक्त्व का सदभाव न होने से प्रषमाभास होता है। Prasamabhasa- False pride of spiritual calmness
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == स्यात् : == नियमनिषेधनशीलो निपातनाच्च य: खलु सिद्ध:। स स्याच्छब्दो भणित:, य: सापेक्षं प्रसाधयति।। —समणसुत्त : ७१५ जो सदा नियम का निषेध करता है और निपात रूप से सिद्ध है, उस शब्द को ‘स्यात्’ कहा गया है। यह वस्तु को सापेक्ष सिद्ध करता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवर्तक (साधु)- जो ज्ञान से अल्प है परन्तु सर्व संघ की मर्यादा योग्य आचरण का जिसको ज्ञान है उसको प्रवर्तक साधु कहते है। Pravartaka ( Sadhu )- A type of Digamber Jain saints