मध्य ग्रैवेयक!
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्य ग्रैवेयक – Madhya Graviveyaka. Three particular heavenly abodes among 9 Graiveyaks. 9 ग्रैवेयक विमानों में बीच के तीन विमान ;यशोधर,सुभद्र , सुविशाल “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्य ग्रैवेयक – Madhya Graviveyaka. Three particular heavenly abodes among 9 Graiveyaks. 9 ग्रैवेयक विमानों में बीच के तीन विमान ;यशोधर,सुभद्र , सुविशाल “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संव्यवहरण दोष – Sanvyavaharana Dosha. A fault related to saint food, careless activities in offering food to saint. श्रावक के निमित्त से होने वाला जैन साधुओं के आहार का एक दोष ” साधु को आहार देने के लिए बर्तन आदि को शीघ्रता से बिना देखे उठाना संव्यवहरण दोष है “
गोरति Name of a Vidyadhar-one proficient in super power by birth. एक महारथी विद्याधर ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मद्यांग जातीय कल्प वृक्ष- Madyamga Jatiya Kalpavrksha. A type of wish fulfilling tree (providing exhilarating liquids). कल्पवृक्ष ; फैलती हुई सुंगंधि से युक्त तथा अमृत के समान मीठे मधु-मैरेय, सीधु, अरिष्ट और आसव आदि अनेक प्रकार के रसों को प्रदान करने वाले कल्प वृक्ष ” उपचार से इन वृक्षों को मद्यांग कहा है…
उत्पत्ति Origination, Birth. जीवों की उत्पत्ति अर्थात् जन्म लेना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभ – Shubha. Auspicious, Prosperous, Lucky, A type of physique making Karma Causing attractive body. मांगलिक, समृद्धशाली, नामकर्म का एक भेद जिसके उदय से शरीर रमणीय होता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मतिज्ञान सिद्ध – Matigyana Siddha. Beings salvated by sensory knowledge ( according to Bhutpragyapan Naya). भूत प्रज्ञापननय की अपेक्षा मतिज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रक्तोदा नदी – 14 महानदियो में चैहदवी महानदी, यह षिखरी पर्वत के पुण्डरिक द्रह से निकलकर पष्चिम की ओर ऐरावत क्षेत्र में बहती है। Raktoda nadi-Name of a great river which flows in Eravat region
गौड़िया Brahma Sampraday (a religious community) pertaining to dualism. ब्रह्म सम्प्रदाय सो द्वैतवादी है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समचतुरस्त्र संस्थान – Samacaturasra Samsthaana. Balanced formation of the body organs. 6 संस्थानो मे एक संस्थान, ऊपर नीचे मध्य मे कुषल षिल्पी के द्वारा बनाये गये समच्रक की तरह समान रुप से शरीर के अवयवो की रचना अर्थात् शरीर की लम्बाई-चैड़ाई और ऊंचाई हीनाधिक न होकर समविभक्त होना।