ध्रुवसेन!
ध्रुवसेन Name of a great Acharya, possessing knowledge of 11 Angas. भगवान महावीर स्वामी के पीछे हुए 11 अंगों के ज्ञाता 5 आचार्यों में चैथे आचार्य, अपरनाम द्रुमसेन। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ध्रुवसेन Name of a great Acharya, possessing knowledge of 11 Angas. भगवान महावीर स्वामी के पीछे हुए 11 अंगों के ज्ञाता 5 आचार्यों में चैथे आचार्य, अपरनाम द्रुमसेन। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == समाधि : == जो झायइ अप्पाणं, परमसमाही हवे तस्स। —नियमसार : १२३ जो अपनी आत्मा का ध्यान करता है, उसे परम समाधि की प्राप्ति होती है। य इन्द्रियाणां विषया मनोज्ञा:, न तेषु भावं निसृजेत् कदापि। न चामनोज्ञेषु मनोऽपि कुर्यात , समाधिकाम: श्रमणस्तपस्वी।। —समणसुत्त : ४९२ समाधि की कामना…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवृत्ति – प्रमाण से किसी वस्तु को जानकर उसे पाने या छोड़ने की इच्छा सहित चेश्टा करना। Pravrtti- Activity, trend, tendency
ध्यानप्रवाह Course of meditation. संपूर्ण ध्यान की स्थिति। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चक्र A wheel, ring, a group, a circular shape, First Patal (layer) of Sanatkumar heaven, Prime jewel of Chakravarti (emperor), See – Dharmacakra. सनत्कुमार स्वर्ग का प्रथम पटल, चक्त्रवारती का एक प्रधान रत्न, देखें- धर्मचक्र ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान- pratyakhyana Resolution or determination (for not committing fault) आगामी काल दोश न करने की प्रतिज्ञा करना।
धृतिषेण Name of a great Acharya possessing knowledge of 11 Angas & 10 Purvas. भद्रबाहु प्रथम (श्रुतकेवली) के पश्चात् हुए 11 अंग व 10 पूर्वधारी सातवें आचार्य (ई. पू. 263-245)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सज्जन-दुर्जन : == सुजणो वि होइ लहुओ, दुज्जणसंमेलणाए दोसेण। माला वि मोल्लगरुया, होदि लहू मउयसंसिट्ठा।। —भगवती आराधना : ३४५ दुर्जन की संगति करने से सज्जन का महत्व गिर जाता है, जैसे कि मूल्यवान माला मुर्दे पर डाल देने से निकम्मी—तुच्छ, त्याज्य हो जाती है। सरिसे वि मणुयजन्मे डहइ…
धृतपद्म A king of Kuru dynasty. अनेक कुरूवंशी राजाओं के पश्चात् हुआ एक राजा। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]