मुर्छित!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुर्छित– Muurchhit. Unconcious one, Beings with delusions & passions. बेहोश, मोही, मिथ्याद्रष्टि जीव , जो देह कुतुम्बादि को अपना माने”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुर्छित– Muurchhit. Unconcious one, Beings with delusions & passions. बेहोश, मोही, मिथ्याद्रष्टि जीव , जो देह कुतुम्बादि को अपना माने”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वितत – Vitata.: Expanded or extented tone (of musical instrument etc.). एक प्रकार का प्रायोगिक शब्द,सितार आदि के शब्द को वितत कहते हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंत्र: Mystic verses or texts. जो गुप्त रूप से बोले जाते हैं उन्हें मंत्र कहते हैं ” ‘मत्री’ धातु से गुप्त भाषण के अर्थ में मंत्र शब्द बना हैं जो एक अक्षर से लेकर अनेकों अक्षरों तक होते हैं, जैसे – ‘ॐ’ , अर्हं , असिआउसा आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाट्यशाला – Natyasala place of dancing related to Samavashran (assembly of lord arihant. समवशरण में जहां देवकन्याएँ नृत्य करती है ” “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव स्त्री – Bhava Stri. Psychical female one. स्त्री वेद के उदय से पुरुष की अभिलाषा रूप मैथुन संज्ञा का धारक जीव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजयमित्र – Vijayamitra.: Name of the 32nd chief disciple of Lord Rishabhdev. तीर्थंकर ऋषभदेव के 32वें गणधर “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सदभाव स्थापना – Sadbhaava Sthaapanaa. Installing right imagination of something in an artificial form. तदाकार स्थापना, जिसका जैसा आकार अथवा रुप हो वैसा ही उसकी मूर्ति मे संकल्प अथवा संकल्पना करना।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्दावण – Viddavana. Rending or splitting the body organs of beings for trade. प्राणियों के छेदन आदि का व्यापार विद्दावण कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विजय – Vijaya.: Victory,Name of the governing demigod of Lord Suparshvanath,Name of the first Balbhadra,Name of an Anuttar heavenly abode. जीत,भगवान चन्द्रप्रभु का शासन देव ,प्रथम बलभद्र ,एक अनुत्तर विमान “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मंखली:A prapogator of falsehood. अपरनाम. मस्करीयापूरनकश्यप द्य भाव संग्रह ग्रंथ के अनुसार ये पहले दिगम्बर मुनि थे पुनःभगवान महावीर के समवशरण से बाहर निकल कर इन्होंने अज्ञान मत का प्रचार किया ।