सप्त ऋषि पूजा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्त ऋषि पूजा – Sapta Risi Poojaa. A reverential worshipping book written by Manaranglal. मनरंगलाल (ई. सं. 1850-1890) द्वारा रचित पूजा।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सप्त ऋषि पूजा – Sapta Risi Poojaa. A reverential worshipping book written by Manaranglal. मनरंगलाल (ई. सं. 1850-1890) द्वारा रचित पूजा।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलाचार प्रदीप–Mulachar Pradeep. Name of a book written by Acharya Sakalkirti. आचार्यसकलकीर्ति (ई. 1424) कृत मुनियों के चारित्र सम्भंदी एक ग्रंथ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकुब्जा – Prakubja. Name of the chief Aryika in the assembly of Lord Ajitanath. अजितनाथ भगवान के समवसरण की प्रधान आर्यिका अर्थात् गणिनी का नाम “
गौणसेन A disciple of Acharya Siddhantsen. आचार्य सिद्धांतसेन के शिष्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सनातन – Sanaatana. A Sankhya thinker, immemorial or eternal. एक सांख्य विचारक, प्राचीन काल से चला आता हुआ क्रम।
दर्पणतुल्य भूमि An excellence of Lord Arihant (Land to have like mirror).अरहंतो के केवलज्ञान का एक, अतिशय, दर्पण के समान भूमि का स्वच्छ होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == कुल : == पुरिसाण कुलीणाण वि न कुलं विणयस्स कारणं होइ। चंदाऽमय—लच्छि सहोयरं पि मारेइ किं न विसं।। —गाहारयणकोष : १०० कुलीन पुरुषों का कुल विनय (आचार) का कारण (प्रमाण) नहीं होता। विष चन्द्र, अमृत एवं लक्ष्मी का सहोदर होते हुए भी क्या प्राण नाश नहीं करता ?
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वित्तसार – Vittasaara.: Name of a treatise written in Apabhransh language. श्रावक एवं मुनि धर्म सम्बन्धी अपभ्रंश भाषा का ग्रन्थ (ई.श. 15) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सनत्कुमार देव – Sanatkumaara Deva. Name of the Indra of third heaven (Sanatkumar). तीसरे सनत्कुमार स्वर्ग के इन्द्र ये भगवान के जन्मकल्याणक मे माहेन्द्र इन्द्र के साथ चंवर ढुराते है।