तैजस द्रव्य वर्गणा!
तैजस द्रव्य वर्गणा A type of aggregates of karmic molecules producing lustre in body. 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा, जो शरीर को कांति देती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तैजस द्रव्य वर्गणा A type of aggregates of karmic molecules producing lustre in body. 23 वर्गणाओं में एक वर्गणा, जो शरीर को कांति देती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आहार-काल Divinely emanation of translocational body (Aharak Sharir). दिगम्बर जैन साधुओं का भोजन काल-3 मुहूर्त जघन्य 2 मुहूर्त मध्यम 1 मुहूर्त उत्कृष्ट काल है(मूलाचार ग्रन्थ के अनुसार)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्मल आकाश –Nirmala Aakaasha. Absolute pure sky, immaculateness of sky (an excellenc of Lord – Arihant). 14 देवकृत अतिशियोंमें एक अतिशय; आकाश का धुआं, उल्कापातादी से रहित होकर निर्मल हो जाना”
आहारक मिश्र काययोग Vibration in soul-points during the completion of Aharak Sharir. आहारक शरीर की उत्पत्ति प्रारम्भ होने के प्रथम समय से लगाकर शरीर पर्याप्ति पूर्ण होने तक अन्तर्मुहुर्त के मध्यावर्ती अपरिपूर्ण शरीर के द्वारा उत्पन्न योग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्दंड – Nirdanda. utkrisht Freedom of soul from all types of faults ( reg.mind, speech or body). मानदंड या मनोयोग, वचनदण्ड और कायदण्डके योग्य द्रव्यकर्मो तथा भावकर्मो का अभाव होने से आत्मा निर्दंड (निर्दोष) होती है “
तिलका A city in the north of Vijayardh mountain. विजयार्थ की उत्तर श्रेणी का एक नगर। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरुपणा – Nirupanaa. Act of defining, exposition or investigation. नाम, जाति आदि की दृष्टि से कथन या अन्वेषण करना “
तिर्यग्गतिप्रायोग्यानुपूर्वी Existence of old body form before taking the new birth (reg. Tiryanch Gati). वह नामकर्म जिसके उदय से तिर्यचगति में जाते हुए विग्रहगति में पूर्व के शरीर के आकार के समान जीव (आत्मप्रदेश ) का आकार बना रहे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्पलगुल्मा Name of a Vapi (like large lakes) of Nandan forest of Sumeru mountain. सुमेरू पर्वत के नंदन वन की तीसरी वापी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]