लयन कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लयन कर्म – कर्म का एक भेद लयन अर्थात पर्वत, उसमे निर्मित प्रतिमाओ का नाम लयन कर्म है। Layana Karma-Scripture to carve out lord idol in the mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लयन कर्म – कर्म का एक भेद लयन अर्थात पर्वत, उसमे निर्मित प्रतिमाओ का नाम लयन कर्म है। Layana Karma-Scripture to carve out lord idol in the mountain
खंडकृष्टि Medium attenuation, a part of krashti (gradual destruction of passions). कृष्टि का भाग ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सज्जन : == सम्माणेसु परियणं पणइयणं पेसवेसु मा विमुहं। अणुमण्णह मित्तयणं सुपुरिसमग्गो फूडो एसो।। —कुवलयमाला: ८५ परिजनों का सम्मान करो, प्रेमीजनों के प्रति उपेक्षा मत करो और मित्रजनों का अनुमोदन करो, यही सज्जनों का सही मार्ग है। थेवं पि खुडइ हियए अवमाणं सुपुरिसाण विमलाणं। वाया लाइय—रेणुं पि पेच्छ…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रात्रिक प्रतिक्रमण – रात्रि में हुए दोशों का जो प्रतिक्रमण प्रात सामायिक से पूर्व किया जाता है वह रावित्रक प्रतिक्रमण कहलाता है। Ratrika Pratikarmana- penitential retreat, an observation of Jaina saints pertaining to night infraction
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावना लीनता – Bhavana Linata. Deep engrossment in meditation for supreme bliss. अपने अंतरंग में लीन रहना जिससे परम सुख की प्राप्ति होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यशोधचरित्र – वादिराज द्वि ई 1010 – 1065 कृत, कवि पùनाथ ई 1405 – 1425 कृत, सकलकीर्ति ई 1406 – 1442 आदि विद्वानो द्वारा इस विशय के कइ ग्रन्थ रचे गए है। Yasodharacaritra-A character portrayal by many writers
गुणसेन A disciple of Acharya Veersen Swami. आचार्य वीरसेन स्वामी के शिष्य (ई. १०७३)।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
खंडदेव Medium attenuation, a part of krashti (gradual destruction of passions). पूर्व मीमांसा दर्शन के एक प्रवर्तक जिन्होंने ‘भाट्टपीदिका’ आदि ग्रंथों की रचना की ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्ति–Muurti. Lord idol, An Image. स्थापना निक्षेप से किसी का स्वरुप समझने के लिए उसकी तदाकार मूर्ति बनाना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगनिर्वाणसाधनाक्रिया – गर्भान्वय की एक क्रिया, अन्तिम अवस्था प्राप्त हो जाने पर साधु द्वारा षरीर आहारदि से ममत्व छोडकर पंचपरमंेही का ध्यान करना। Yoganirvana Sadhana Kriya-Aversion from the life for getting salvation, an auspicious activity