पुद्गल अनुभाग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल अनुभाग – Pudgala Anubhaga. Fruitional power of Karmas (Pudgal). ज्वर आदि रोगों के उत्पन्न करने और विनाश करने का नाम पुद्गलानुभाग है, अर्थात् पुद्गलकर्मों के शुभाशुभ फल देने की शक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल अनुभाग – Pudgala Anubhaga. Fruitional power of Karmas (Pudgal). ज्वर आदि रोगों के उत्पन्न करने और विनाश करने का नाम पुद्गलानुभाग है, अर्थात् पुद्गलकर्मों के शुभाशुभ फल देने की शक्ति “
उदासीन Passive, Indifferent, Neutral. तटस्थ निःस्पृह तत्ववेत्ता जगत के समस्त तत्वों में मैं और मेरेपन का संकल्प न होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रज्ञप्ति – Pragyapati. Name of ruling female demigod of Lord Sambhavanath, A type of super power. सम्भवनाथ भगवान की शासन देवी का नाम, विधाधरों की एक विधा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्य (तत्त्व) – Punya (Tattva) Merits, Pious qualities or elements. जीव के दया, दानादि रूप शुभ परिणाम जिससे आत्मा विशुद्ध हो पुण्य कहलाते हैं “
उदीरक Who is involved in fruitional operations of Karmas. उदीरणा करने वाला ज्ञानावरणीय दर्शनावरणीय और अंतराय इन तीन कर्मोंकी उदीरणा करने वाले (मिथ्यादृष्टि से लेकर क्षीण कषाय पर्यंत) जीव उदीरक कहलाते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मरण : == एकं पण्डितमरणं, छिनत्ति जातिशतानि बहुकानि। तद्मरणे मत्र्तव्यं, न मृत: सुमृत: भवति।। —समणसुत्त : ५७० एक पंडित मरण (ज्ञानपूर्वक मरण) सैकड़ों जन्मों का नाश कर देता है। अत: इस तरह मरना चाहिए, जिससे मरण सुमरण हो जाए। एकं पण्डितमरणं, प्रतिपद्यते सुपुरुष: असम्भ्रान्त:। क्षिप्रं स मरणानां, करिष्यति…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचास्तिकाय – Panchaastikaaya. A great treatise written by Acharya Kund-kund. आचार्य कुन्द-कुन्द (ई.127-179) द्वारा रचित ग्रंथ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालयती – Balayati. A celibate saint from childhood. अविवाहित रहकर जो कुमार अवस्था मे ही दीक्षा धारण कर लेते हैं, ऐसे मुनि ” चौबीस तीर्थकरो मे से पाँच तीर्थकर (वासुपूज्य, मल्लिनाथ,नेमिनाथ, पाश्रृनाथ व महावीर स्वामी) बालयती हुए है “
एकत्व भावना Feeling of unitariness (reg. difference in soul & family etc.). कुटुम्ब परिवार आदि को आत्मा से भिन्न करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लंगल – सनत्कुमार स्वर्ग का 5 वां पटल या इन्द्रक, बलभद्र राम का एक हल रत्न। Lamgala-The 5th patal (Layer) of Sanat Kumar heaven, Name of a plough-a jewel of Lord Ram