भूतज्ञायक शरीर!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतज्ञायक शरीर – Bhutagyaka Sarir. Left body of most learned one (after death). कर्मस्वरूप की जाने वाला जिस शरीर को छोड़ आया है वह भुतज्ञायक शरीर है इसके च्युत, च्यावित, त्यक्त ३ भेद हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतज्ञायक शरीर – Bhutagyaka Sarir. Left body of most learned one (after death). कर्मस्वरूप की जाने वाला जिस शरीर को छोड़ आया है वह भुतज्ञायक शरीर है इसके च्युत, च्यावित, त्यक्त ३ भेद हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरुक्ति – Nirukti. Commentary, Explanation, Etymological interpretation of words. व्युत्पत्ति, शब्दों की व्युत्पत्ति (व्याकरण) सहित व्याख्या “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिमबाहू – Bhimabahu. The son of Dhratrashtra Gandhari. धृतराष्ट – गांधारी के दो पुत्रों में एक का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकांक्ष अनशन – Niraakaanksha Anashana. Fasting without any worldly desire. बिना किसी लौकिक आकांक्षा के अनसन करना “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य गणधर– Mukhya Gandhar. Head of the chief of disciples of Lord. तीर्थंकर के प्रधान शिष्य, जो दिव्यध्वनी का सार दवादवाशांगश्रुत के रूप में जगत को प्रदान कटे है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवत्सा (देवी) – Suvatsaa (Devi). Name of a female divinity of kanak summit of saumnas Gajdant mountain. सौमनस गजदंत के कनक कूट की स्वामिनी दिक्कुमारी देवी ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरन्वय – Niranvaya. Inapplicability, discrete, Irrelevance. संगतिरहित, सम्बंधरहित, असंबद्ध “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति बंध – Prakrti Bandha. Regular binding of different types of karmic natures. राग, द्वेषादि के निमित्त से जीव के साथ ज्ञानावरणादि कर्मों का निरंतर बंध होना अर्थात् जीव के भावों की विचित्रता के अनुसार विभन्न प्रकार की फलदान शक्ति वाले कर्मों का बंध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकविनिश्चय – Lokavinishcaya.: Name of a Prakrit treatise. एक प्राकृत भाषा का ग्रन्थ ,इसके लेखक का नाम व समय अज्ञात है “