शुद्ध ध्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध ध्यान – Shuddha Dhyaana. The supreme & absolute meditation. रागादि की सत्ता के क्षीण होने पर अंतरंग आत्मा के प्रसन्न होने से जो अपने अवारूप का अवलंबन है, वह शुद्ध ध्यान है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध ध्यान – Shuddha Dhyaana. The supreme & absolute meditation. रागादि की सत्ता के क्षीण होने पर अंतरंग आत्मा के प्रसन्न होने से जो अपने अवारूप का अवलंबन है, वह शुद्ध ध्यान है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग संक्रान्ति – योग सक्रान्ति प्रथम षुक्लध्यान में मन वचन काय योगो का पलटना। Yoga Samkramti- Transition of all activities (related to mind speech & body) in auspicious & sacred mode
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध उपलब्धि – Shuddha Upalabdhi. Attainment of pure spiritual knowledge. निश्चयरूप ज्ञान की प्राप्ति या अन्तरातमा का प्रत्यक्ष अनुभव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल स्कन्ध – Pudgala Skandha. Aggregate of molecules (a bind form). जिन परमाणुओं ने परस्पर बंध कर लिया है वे स्कन्ध कहलाते हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यश:नामकर्म प्रकृति–Yashah Naamkarm Prakrati. A type of Karmic nature causing fame or good name. जिस नामकर्म के उदय से जीव के पवित्र गुणों की ख्याति या प्रसिद्धि होती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल अस्तिकाय – Pudgala Astikaya. One of the five Astikayas. पांच अस्तिकायों में एक; इसमें एक प्रदेश वाले अणु को भी प्रदेश प्रचय की शक्तिरूप स्वभाव के कारण अस्तिकाय कहा है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामदेव – Vaamadeva.: Name of a Bhattarak of Moolsangh of saints after Lord Mahaveera. मूलसंघी भट्टारक ,प्रतिष्ठा आदि विधानों के ज्ञाता ” कृतियां – भावसंग्रह, त्रैलोक्यप्रदीप, त्रिलोकसार पूजा, तत्त्वार्थसार आदि ” समय – वि.श. 14-15 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुण्य आस्त्रव – Punya Asrava. Influx of meritorious & auspicious Karmic results. पुण्यकर्म आने योग्य भाव; मन वचन काय की शुभ क्रिया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूचिर – रूचक पर्वत पर स्थित एक कूट, सौधर्म एषान स्वर्ग का 16 वां पटल व इन्द्रक। Rucira-Name of a summit of ruchak mountain, name of the 16th Patal (layer) and Indrak of Eshan heaven
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वादिराज – Vaadiraaj.: Name of a great Acharya, the writer of ‘Ekibhava Stotra’. एक आचार्य जिन्होंने एकीभाव स्तोत्र की रचना कर अपने कुष्ठ रोग को दूर किया “इनकी अन्य रचनाएं पार्श्वनाथ चरित्र ,यशोधर चरित्र ,न्याय विनिश्चय विवरण आदि हैं (समय –ई.स. 1010 – 1065) “