स्पर्ष अंतर विधान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष अंतर विधान – Sparssa Amtara Vidhaana. A type of anuyogdwar (disquisition door).अनुयोगद्वार के 8 भेदो मे ‘स्पर्शन’ अनुयोगद्वार के 16 उपभेदो मे एक भेदं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष अंतर विधान – Sparssa Amtara Vidhaana. A type of anuyogdwar (disquisition door).अनुयोगद्वार के 8 भेदो मे ‘स्पर्शन’ अनुयोगद्वार के 16 उपभेदो मे एक भेदं।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृत्तयंश –Vrttyainsa Momentariness of any matter. पर्याय; पर्यायों का क्षणिकत्व होना या द्रव्य में जो अंश कल्पना की जाती हैं वह पर्याय हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थूल व्रत – Sthuula Vrata. To desist from killing, telling lie, stealing etc. (a vow).अणुव्रत। अर्थात् लोक प्रसिद्व हिंसादि को स्थूल कहते है, उनका त्याग ही स्थूल व्रत है।
[[जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == कवि : == परेषां दूषणाज्जातु न बिभेति कवीश्वरा:। किमुलूकभयाद् धुन्वन् ध्वान्तं नोदेति भानुमान्।। —आदिपुराण : १-७५ दूसरों के भय से कविजन (विद्वान) कभी डरते नहीं हैं। क्या उल्लुओं के भय से सूर्य अंधकार का नाश करना छोड़ देता है ?
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिति सत्त्व स्थान – Sthiti Sattva sthaana. Existing places of karmic states.अविचल, कर्मों की स्थिति के सत्ता रुप विविध स्थान।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संज्ञ – Sangya. Mind, mental power. मन ” जो भली प्रकार जानता हैं उसको संज्ञ अर्थात मन कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिति अपसरण – Sthiti Apasarana. Reduction in duration of bound Karmas.कर्मों की स्थिति का क्रम से धटना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थान – Sthaana. Place, position. जगह। जिसमे संख्या अथवा जिस अवस्था विशेष मे प्रकृतियाॅ ठहरती है उसे स्थान कहते है। स्थान, स्थिति और अवस्थान तीनो एकार्थक है। अविभाग प्रितिच्छेदो का समूह वर्ग, वर्ग का समूह वर्गणा का समूह स्पर्धक, स्पर्धक का समूह गुणहानि और गुणहानि का समूह स्थान है।
चेष्टा Endeavour, Gesture, Activity. किसी वस्तु के लेने व छोड़ने के लिए सक्रिय होना , प्रयत्न या प्रयास करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]