देवदत्ता!
देवदत्ता A reverential palanquin (pertaining to Lord Vimalnath). एक पालकी तीर्थंकर विमलनाथ इसी पर आरूढ़ होकर दीक्षा लेने हेतु सहेतुक वन गये थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवदत्ता A reverential palanquin (pertaining to Lord Vimalnath). एक पालकी तीर्थंकर विमलनाथ इसी पर आरूढ़ होकर दीक्षा लेने हेतु सहेतुक वन गये थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुकसम श्रोता – Shukasama shrotaa A kind of listener having less grasping capacity as parrot. तोते के सामान श्रोता अर्थात जो दूसरों के समझाने पर कुछ शब्द मात्र ग्रहण कर पाते हैं ” ये माध्यम श्रोता कहलाते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेदनाभिभव –Vedanabhibhava A reason of right perception ( by experiencing about the painful results of some wrong doings). सम्यग्दर्शन होने का एक कारण, यह वेदना अमुक मिथ्यात्व व असंयम का फल है इस प्रकार का चिंतन “
चक्षुदर्शन Visionary conation, ocular perception. चक्षु इन्द्रिय के द्वारा पदार्थ का ज्ञान होने से पूर्व जियो सामान्य प्रतिभास होता है वह चक्षुदर्शन है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचिक – Vaachika.: To pay reverence eulogically (directly or indirectly). उपचार विनय के 3 भेदों में एक भेद ; वचनों अर्थात गुणानुवाद द्वारा प्रत्यक्ष या परोक्ष विनय करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव विह्र्ल पूर्ण – Bhava Vivhala Purna. One with full of emotions. भावुकता पूर्ण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचसमवाय – Panchasamavaaya. Five kinds of inherent properties. स्वभाव, निमित्त, नियति, पुरुषार्थ व भवतव्य यें पांच समवाय कहे जाते हैं” एन पाँचों सैमवायों से समवेत ही कार्यव्यवस्था की सिद्धि है, ऐसा प्रायोजन है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजपद – BijaPada. Essenceful group of words used for infinite knowledge. संक्षिप्त शब्द रचना से सहित अन्तत अर्थो के ज्ञान का हेतु – भूत अनेक चिह्नों सें संयुक्त बिजपद कहलाता है “