पतिबंध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पतिबंध – Pratibandha. Prohibition, Restriction, Limitation, Hindrance. निषेध होना ” अवरोध, विरोध “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पतिबंध – Pratibandha. Prohibition, Restriction, Limitation, Hindrance. निषेध होना ” अवरोध, विरोध “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतितंत्र – Pratitantra. Ambiguous meaning (indistinct). एक शास्त्र में सिद्ध और दूसरे शास्त्र में असिद्ध अर्थ प्रतितंत्र कहलाता है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == संसार : == धिक् संसारं यत्र, युवा परमरूपर्गिवतक:। मृत्वा जायते, कृमिस्तत्रैव कलेवरे निजके।। —समणसुत्त : ५११ इस संसार को धिक्कार है, जहाँ परम रूप-र्गिवत युवक मृत्यु के बाद अपने उसी त्यक्त मृत शरीर में कृमि के रूप में उत्पन्न हो जाता है। न नास्तीहावकाशो, लोके बालाग्रकोटिमात्रोऽपि। जन्ममरणबाधा, अनेकशो…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योशिता – स्त्री, चक्रवर्ती के 14 रत्नो में एक रत्न। Yosita-A women one of the 14th Jewels of Chakravarti
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यावानुद्देष – औद्देषिक आहार के 4 भेदो में एक भेद। Yavanuddesa-Food prepared with the intention of distributing to everyone
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्कल – Puskala. An area of the eastern Videh (region), Name of a summit & its protecting deity of Ekashail Vakshar situated in the eastern Videh (region). पूर्व विदेह का एक क्षेत्र, पूर्व विदेह स्थित एकशैल वक्षार का एक कूट एवं उसका रक्षक देव “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकृति सांन्तर – Prakrti Santara. Karmic nature with momentary binding. जिन कर्म प्रकृतियों का एक समय बंध होकर द्वितीय समय में जिनका बंध विश्रांत हो जाता है वे सांतर बंधी प्रकृतियां कहलाती हैं “