समाधि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधि – Samaadhi. Profound ordeep meditation (esp. with the concentration upon the soul). वीतराग भाव से आत्मा का ध्यान करना समाधि है अथवा समस्त विकल्पांे का नष्ट हो जाना समाधि है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समाधि – Samaadhi. Profound ordeep meditation (esp. with the concentration upon the soul). वीतराग भाव से आत्मा का ध्यान करना समाधि है अथवा समस्त विकल्पांे का नष्ट हो जाना समाधि है।
गतिहीन Static, Steady. गतिरीय; सिद्ध परमेष्ठी या धर्मं-अधर्म-आकाश-काल द्रव्य ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुभानुबंधा निर्जरा – Shubhaanubandhaa Nirjaraa. Dissociation of immature Karmas causing auspicious temperament. मिथ्याद्रिष्टियों की अविपाक निर्जरा-इच्छा निरोध न होने के कारण यह शुभानुबंधा निर्जरा कहलाती है
गणग्रहण क्रिया An act of consecration-departing of passionful deities and installing passionless deities. दीक्षान्वय क्रियाओं की चौथी क्रिया; नया दीक्षित जैनी अपने घर से रागी देवों को विदाकर वीतराग देव की पूजा व स्थापना करता है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चंड A great writer, A king of Rakshasa descendant. ई.पू,३ का एक प्राकृत विद्वान् जिन्होंने प्राकृत लक्षण नाम का एक प्राकृत व्याकरण लिखा, राक्षस वंश का एक राजा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार नाटक टीका – Samayasaara Naataka Teekaa. Name of a commentary book written by Pandit Sadasukh. पं. सदासुख (ई. 1795-1867) कृत समयसार नाटक पर लिखी गई टीका।
गजवती A river of varun mountain in Bharat kshetra (region). भारत क्षेत्र के वरुण पर्वत पर स्थित एक नदी ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसर्जन –Visarjana. Completion, Sending deities back with respect. समापन, पूजा के ५ अंगों में एक अंग, जो पूजा की समाप्ति पर किया जाता है ” इसमें आगन्तुक देवों को आदरपूर्वक अपने-अपने स्थानों पर जाने के लिए प्रार्थना की जाती हैं “
घनान्गुल Cubic finger. अंगुल के घन को घनान्गुल कहते हैं, जिसमें लम्बाई , चौड़ाई एवं मोटाई विवक्षित रहती हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समयसार (टीका) – Samayasaara (Teekaa). The commentary books on samayasar treatise written by 1. Acharya Amritchandra 2. Acharya Jaisen etc. आचार्य अमृतचन्द्र (ई. 905-955) द्वारा कृत आत्मख्याति संस्कृत टीका, आचार्य जयसेन (ई. श. 12-13) द्वारा कृत तात्पर्यवृत्ति संस्कृत टीका, पं. जयचंद छाबड़ा (ई. 1807) कृत आत्मख्याति वचनिका हिन्दी टीका, आचार्य श्री ज्ञानसागर (आचार्य श्री…