आलोकित पान भोजन!
आलोकित पान भोजन To take purified and observed food. अहिंसा महाव्रत की एक भावना अर्थात् देख शोध कर भोजन पान ग्रहन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आलोकित पान भोजन To take purified and observed food. अहिंसा महाव्रत की एक भावना अर्थात् देख शोध कर भोजन पान ग्रहन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वज्रनाराचसंहनन – Vajranaaraachasanhanana. An osseous structure . 6 सहननों में दूसरा संहनन , जिसमें वज्रमय हड्डियों दोनों ओर वज्रमय नाराच अर्थात कील से जुडी होती हैं ” यह नामकर्म की एक प्रकृति है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नेमिनाथ बसंत – Neminaath Basanta. Name of a book. बूचिराज (ई.शु.16) कृत नेमिनाथ भगवान के वैराग्य विषयक एक काव्य कृति “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशिष्ट पद – Vishishta.Pada. A kind of dicquisition door . पदमीमांसा आदि अनुयोगद्वारा के उत्क्रष्टादि भेद पदों के १३ भेदों में से एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शीतोष्ण – Sheetoshna. A kind of female genital organ (having to do with cold and hot). योनि के 9 भेदों में एक भेद; जो योनि शीत एवं उष्ण दोनों स्पर्श रूप होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नृत्यमाल – Nrtymaala. Ruling deity of Khandprapata, the summit of vijayardh mountain. विजयार्थ पर्वत के खण्डप्रपात कूट का स्वामी देव “
द्वितीय वर्ग Square of first square (mathematically). प्रथम वर्ग का पुनः वर्ग करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नीलक –Neelaka. Name of a deity resident of a summit ‘Shrivraksha’ situated in the west of Ruchakgiri (mountain). रुचकगिरी की पश्चिम दिशा में श्रीवृक्षकूट का निवासी देव “
द्वारवंग A place, present Darbhanga district. वर्तमान दरभंगा जिला। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शिवसागर – Shivasaagara. Name of the 2nd pattacharya in the tradition of great Acharya Charitra Chakravarti Shri Shantisagarji, who was the disciple of Acharya Virsagar. चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी की परम्परा के द्वितीय पट्टाचार्य एवं प्रथम पट्टाचार्य श्री वीरसागर जी महाराज के प्रमुख शिष्य ” सन 1957 में ये आचार्यपट्ट पर आसीन हुए…