त्रिपंचाशत् भाव!
त्रिपंचाशत् भाव Fifty three types of subsidential disposition. जीवों के औपशमकादिभाव जो 53 प्रकार के हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिपंचाशत् भाव Fifty three types of subsidential disposition. जीवों के औपशमकादिभाव जो 53 प्रकार के हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
ध्वजा Flag, an auspicious device which is kept with idols of Lord Arihant. झंडा जिन प्रतिमा के समीप विद्यमान रहने वाले 108 उपकरणों में एक । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीर पर्याप्ति – Sharera Paryaaypti. Formation of assential elements of body. पर्याप्ति के छः भेदों में दूसरा भेद, जिन परमाणुओं को खल्रूप परिणमाया था उनको हाड, रस,रुधिर आदि रूप परिणमावने की कारण भूत जीव की शक्ति की पूर्णता को शरीर पर्याप्ति कहते हैं “
आपवादिक लिंग White clothed Digambar Jain ascetics etc. परिग्रह सहित भेष या चिन्ह, आर्यिका (उपचार महाव्रती) ऐकल क्षुल्लक आदि जैनधर्म में दो मार्गं हैं- उत्सर्ग मार्ग और अपवाद मार्ग।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
धैवती Something one pertainting to a vocal tune. संगीत के षड्ज स्वर से सम्बंध रखने वाली एक जाति। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धूपदशमी व्रत A vow (fasting) on the day of Dhupadashmi, one of the Jaina festival. दशलक्षण पर्व में आने वाली दशमी को शीतलनाथ भगवान की पूजा- जाप्य एवं उपवास करना। धूपदशमी के दिन मंदिरों में सामूहिकरूप में अग्नि में धूप खेने की प्राचीन परम्परा है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धारणा Retention of known objects. मतिज्ञान के 4 भेदों में एक भेद ; अवायज्ञान के द्वारा जाने गये पदार्थ का विस्मरण नहीं होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]] या 5 conceptual stages of meditation (Pindastha). पिण्डस्थ ध्यान की 5 धारणाएँ मानी हैं- पार्थिवी , आग्नेयी, वायवी, वारूणी एंव तत्वरूपवती। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवमंत्री Ruling deity of 6th Lunar ‘Pushya’. छठवें नक्षत्र ‘पुष्य’ के अधिपति देवता का नाम।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धर्मोपदेष्टा Preceptor, Religious teacher (saint or sage). वक्ता धर्म का उपदेश देने वाला , जो समस्त श्रुत को जानता है एंव जिसके मन, वचन, काय की प्रवृत्ति शुद्ध है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]