उपशमसम्यग्दर्शन!
उपशमसम्यग्दर्शन Origination of right perception due to upasham. दर्शन मोहनीय कर्म के उपशम से आत्मा में जो निर्मल श्रद्धान उत्पन्न होता है यह प्रथमोपशम एंव द्वितीयोपशम समर्यदर्शन के भेद से 2 प्रकार का है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उपशमसम्यग्दर्शन Origination of right perception due to upasham. दर्शन मोहनीय कर्म के उपशम से आत्मा में जो निर्मल श्रद्धान उत्पन्न होता है यह प्रथमोपशम एंव द्वितीयोपशम समर्यदर्शन के भेद से 2 प्रकार का है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लौकिक शास्त्र –Laukika Shaastra. Compositions providing worldly knowledge. व्याकरण ,गणित आदि लौकिक शास्त्र हैं “
तत्वचिंतन Act of deep thinking over 7 tattvas (matters). शुभोपयोग सात तत्वों का मनन करना। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शांतिनाथ चारित्र – Shantinaatha Chaaritra. Name of a book written in Sanskrit language. संस्कृत भाषा बद्ध एक ग्रंथ “
उपादान कारण(क्षणिक) Affluent cause (momentary). क्षणिक रूप से उपादान कारण होना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोहाचार्य –Lohaacharya.: Name of a great Acharya in the era of Lord Mahaveera . महावीर भगवान के निर्वाण के 565 वर्ष बाद हुए आचारान्गधारी चार आचार्यों में चौथे आचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निवृत्ति – Nivrtti. Devoid of all desires, Datachment from worldly life, Abstinence. समस्त अभिलाषाओं कस त्यग करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोभ प्रत्याख्यान –Lobha Pratyaakhyaana. Renunciation of greed . सत्यव्रत की रक्षार्थ एक भावना ;लोभ के त्याग की भावना “
ईर्यापथ आस्रव A type of Karmic flow. जो कर्म वर्गणा मात्र योगों से आये कषाय का उदय न हो यह 11 वें, 12 वें व 13वें गुणस्थान में होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकालोक विभाग – Lokaaloka Vibhaag.: The universal & non –universal spaces. आकाश द्रव्य के लोक और आलोक का विभाग अर्थात् लोकाकाश और अलोकाकाश “