प्रवचन भक्ति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन भक्ति- प्रवचन में कहे हुए अर्भ का अनुश्ठान करना। 16 कारण भावनाओं में एक भावना; द्वादषांग में अनुराग रखना। Pravacana bhakti- Scriptural devotion
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रवचन भक्ति- प्रवचन में कहे हुए अर्भ का अनुश्ठान करना। 16 कारण भावनाओं में एक भावना; द्वादषांग में अनुराग रखना। Pravacana bhakti- Scriptural devotion
उपरितन कृष्टि A type of krishti (gradual destruction of passions). चरम द्विचरम आदि कृष्टियों को उपरितन कृष्टि कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोगगति- एक प्रकार की गति; पुरुश के प्रयोग से होने वाली बाण, चक्र आदि की गति। Prayogagati- Speed of arrow, wheel etc.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रथम सम्यत्तव – प्रथमोपषम सम्यत्तव । prathama samyaktva – first subsidential righteousness i.e origination of the right beleif for the first time.
उपपादयोग स्थान The place of soul before incarnation . योगों का स्थान अर्थात् आत्मा के प्रदेशों का सकंप जो नवीन शरीर धारण करने के पहले समय में होता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक शरीर नाम कर्म प्रकृति – जिसके उदय से शारीर में एक ही जिव जीवित रहता है ” pratyeka sarira nama karma prakrti – physoque making karma of individual or body.
उपचरित स्वभाव Formal nature. स्वभाव का भी अन्यत्र उपचार करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक बुद्ध वचन- प्रत्येक बुद्ध ऋशियों के द्वारा कहे गये आगम। pratyeka buddha vacana – preaching given by one self – enlightened saint.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण (आगम)- शास्त्र आदि में लिखे हुए जिनवचन। सर्वज्ञ-आर्श प्रणीत वचन या आचार्य परम्परा से प्राप्त उपदेष ही आगम प्रमाण है। Pramana (Agama)- Whole Jaina literature (preaching of Acharyas)