प्रमाण स्वार्थ!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण स्वार्थ- अनुमान प्रमाण के भेद; परोपदेष के बिना जो ज्ञान होता है, वह स्वार्थ प्रमाण है। PramanaSvartha- Knowledge gained by self
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण स्वार्थ- अनुमान प्रमाण के भेद; परोपदेष के बिना जो ज्ञान होता है, वह स्वार्थ प्रमाण है। PramanaSvartha- Knowledge gained by self
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण निर्णय- न्याय विशयक एक ग्रंथ का नाम। PramanaNirnaya- Name of a book
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमत्त विरत- छठा गुणस्थान, प्रत्याख्यानावरण कशाय के क्षयोपषम से सकल संयम रुप मुनिव्रत होने के पश्चात् संज्वलन कशाय और नोकशाय के उदय से संयम में मल उत्पन्न करने वाले प्रमाद से सहित दिगम्बर मुनियों के प्रमŸविरत गुणस्थान होता है। PramattaVirata- The 6th stage of spiritual development where saints having perfect vows with passion
उपभोग लोभ Greediness (in consumption etc.) . लोभ का एक भेद उपभोग वस्तुओं के प्रति आसक्ति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रानीक – Sahasraaneeka. One of the sons of Vidyadhar-Vinami. विनमि विद्याधर के अनेक पुत्रों में एक पुत्र ।
ईशान इन्द्र A celestial deity, the 2nd one among all 12 types of Indras. ईशान स्वर्ग के उत्तर दिशा श्रेणीबद्ध विमान में ईशान नाम का दूसरा कल्पवासी इन्द्र रहता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रायोग्यानुपूर्वी- आनुपूर्वी; विग्रहगति में आत्म प्रदेषों का पूर्वषरीराकार बने रहना। Prayogyanupurvi- Existence of soul in transmigratory motion in the same shape as in the previous left body
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यधर्म – Satyadharma. One of the 10 particular religious observances- to speak truly. दशलक्षण धर्मों में एक धर्म ” जो मुनि दुसरे को क्लेश पहुंचाने वाले वचनों को छोड़कर अपने और दुसरे का हित करने वाले वचन कहता है उसके सत्यधर्म होता है ” अथवा सज्जन पुरुषों के साथ श्रेष्ठ वचन बोलना सत्य धर्म…