रूपरेखा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपरेखा – प्रारूप, कार्य या क्रिया विधि बनाना। Ruparekha-General outline
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[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रयोगज परिणाम- आदिमान पिरणाम का एक भेद; जो परिणाम बाह्म निमित पर आश्रित हों । जैसे- ज्ञान,शील, भावना आदि का गुरु उपदेष के निमित से होना, अचेतन मिट्टी आद का कुम्हार आदि के प्रयोग से घटरुप परिणमन आदि। PrayogajaParinama- Results of practical experiments (like knowledge gained from preaching etc)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] र – देवनागरी लिपि का सत्ताईसवां व्यंजन अक्षर, इसका उच्चारण स्थान जीभ से अगले भाग की मूर्धा को स्पर्ष करने से होता है। Ra-The 27th consonant of the devanagari syllabary
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमेयकमलमार्तड- उचाईं मधिक्यनन्दि (ई. 925-1023) कृत परीक्षामुख पर आचार्य प्रमानन्द ( ई. 950-1020) कृत एक टीका। इसकी हिन्दी दिसा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से उनकी षिश्या आर्यिका श्री जिनमती माताजी ने की है। (समयबीसवीं ससदी का उŸाराद्ध)। Prameyakamalamartanda- A book written by acharyaprabhachand
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बुधजन – Buddhajana. Name of a pandit who wrote Tattvarth Bodh, Panchastikaya Bhasha etc many books. तत्वार्थ बोध , पञ्वास्तिकाय भाषा, बुधजन विलास, बुधजन सतसई आदि के कर्ता जयपुर निवासी एक पण्डित का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाद प्रत्यय- कर्म बंध के 5 कारणों में एक कारण; षुभ कार्यो में आलस्य करना। PramadaPratyaya- carelessness in auspicious activities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगचंद्र – ई ष 12 में योगसार के कत्र्ता एक दिगम्बर का नाम। Yogacamdra-Name of a Digambar acharya who wrote a book ‘Yogsar’
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण संग्रह- आचार्य अकलंक भट्ट (ई. 620-680) कृत एक ग्रंथ। PramanaSamgraha- A book written by Acharya AkalankaBhatta
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सचेलता – Sachelataa. To be clothed or covered with cloth. वस्त्र सहित होना अर्थात् सावरण होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यूषकाल- प्रतः का संधि काल। pratyusakala – daybreak, dawn period