हर्षवर्धन!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हर्षवर्धन – Harsavardhana. Name of a king of Bhoj dynasty. भोजवंशी राजा मुञज के पिता। समय ई. 940-994।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हर्षवर्धन – Harsavardhana. Name of a king of Bhoj dynasty. भोजवंशी राजा मुञज के पिता। समय ई. 940-994।
देवद्विज The supreme being, Lord Jinendra. जिनेन्द्र देव , स्वयं भू आदि परमदेव सम्बन्धी रत्नत्रय की शक्ति रूप संस्कार से जन्म लेने वाले। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नादग्रह – Nadagraha A part of the palace of deities भवनवासी देवों के भवनों में एक कक्ष ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शिथिलाचारी : == सन्त्येकेभ्यो भिक्षुभ्य:, अगारस्था: संयमोत्तरा:। अगारस्थेभ्य सर्वेभ्य:, साधव: संयमोत्तरा:।। —समणसुत्त : २९८ यद्यपि शुद्धचारी साधुजन सभी गृहस्थों से संयम में श्रेष्ठ होते हैं तथापि कुछ (शिथिलाचारी) भिक्षुओं की अपेक्षा गृहस्थ संयम में श्रेष्ठ होते हैं।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिद्र – Haridra. The residential palace of Lokpal in the panduk forest of sumeru mountain. सुमेरु के पाण्डुक वन मे लोकपाल का भवन।
एक असंख्यात Something countless. एक दिशा में स्थित प्रदेश पंक्ति क्योंकि श्रेणीरूप से लोकाकाश की एक दिशा देखने पर प्रदेशो की गणना नहीं हो सकती।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथत्त्क्व व्यवहार – Prthaktva Vyavahara. Nature of unity in diversity. व्यवहार का एक भेद; जहाँ पर भिन्न द्रव्यों में एकता का संबंध दिखाया जाता है उसे पृथत्त्क्व व्यवहार कहते हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हरिकंठ – Harikaamta. Name of the 2nd predestined Pratinarayan. आगामी दूसरे प्रतिनारायण।
आय-ज्ञान A book written on astrology by ‘Bhattavosari’. भट्टवोसरि (ई.श.10 उत्तरार्ध) द्वारा रचित एक ज्योतिष विषयक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सेना : == कार्यकृद् गृह्यको जन:। —त्रिषष्टिशलाका : १-१-९०८ जो कार्य (सेवा) करता है, लोग उसे पूजते ही हैं।