वैक्रियिक षटक!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक षटक –VaikriyikaSarka A type of hexa pertaining to transformable body (of deities & hellish beings). वैक्रियिक शरीर व वैक्रियिक अंगोपांग, नरक गति व नरक गत्यानुपूर्वी, देवगति व देवगत्यानुपूर्वी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक षटक –VaikriyikaSarka A type of hexa pertaining to transformable body (of deities & hellish beings). वैक्रियिक शरीर व वैक्रियिक अंगोपांग, नरक गति व नरक गत्यानुपूर्वी, देवगति व देवगत्यानुपूर्वी “
खंड Part, Division, fragment, chapter, Section. भाग, हिस्सा, शास्त्र आदि का भाग, मकान का हिस्सा आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुनिभद्र–Munibhadra. Name of a Acharya. एक आचार्य (ई. सन1350–1390) जिनके शिष्य ने पर्मात्मप्रकाश ग्रंथ पर कन्नड़ टीका लिखी है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == दान : == जह उसरम्मि खित्ते पइण्णवीयं ण िंक पि रुहेइ। फलवज्जियं वियाणह, अपत्तदिण्णं तहा दाणं।। —वसुनन्दि श्रावकाचार : २४२ जिस प्रकार ऊसर खेत में बोया गया बीज कुछ भी नहीं उगाता है, उसी प्रकार अपात्र में दिया गया दान भी फलरहित—सा है। साहूणं कप्पणिज्जं, जं न वि दिण्णं…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == धैर्यवान : == विसयजलं मोहकलं, विलास बिव्वो अजलयराइन्नं। मयमयरं उत्तिन्ना, तारुण्ण महन्नवं धीरा।। —इन्द्रियपराजयशतक : ४३ जिसमें विषयरूपी जल है, मोह की गर्जना है, स्त्रियों की विलासभरी चेष्टा रूप मत्स्य आदि जलचर जीव हैं और मद रूपी जिसमें मगरमच्छ रहते हैं ऐसे तारुण्य रूपी समुद्र को धीर पुरुषों…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भास्करी – Bhaskari. A type of super power. रावण को प्राप्त एक विधा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोक्त्रत्व:Power of experiencing joy & sorrow. जीव की सुख-दुःख भोगने की शक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिभा संस्कारारोपण पूजा – Pratibhaa sanskaaraaropana poojaa. A worshipping hymn composed by Acharya Indranandi. आचार्य इन्द्रनन्दि द्वारा रचित एक पूजा “
आत्मनिन्दन Self – condemnation. सम्यग्दृष्टि के द्वारा अपने दोषों की स्वयं निन्दा और गर्हा करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबंध्य – Pratibandhya. Restricted, Prohibited. प्रतिबंधन अथवा बंधन के योग्य “