रूपस्थ ध्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपस्थ ध्यान – समवषरण में स्थित अरहंत भगवान का ध्यान करना। Rupastha Dhyana-Deeply engrossment in the form of lord Arihant
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूपस्थ ध्यान – समवषरण में स्थित अरहंत भगवान का ध्यान करना। Rupastha Dhyana-Deeply engrossment in the form of lord Arihant
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुमितिलक – Bhumitilaka. A city in the north of vijayardha mountain. विजयार्ध की उत्तर श्रेणी का एक नगर “
तुगवरक A mountain of Bharat kshetra in Arya khand (region). भरतक्षेत्र आर्य खण्ड का एक पर्वत। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
एक प्रस्तरीय (स्तंभ) Monolithic. स्मारक, एक ही ठोस पत्थर का बनरा खंभा।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकसंस्थान Name of a planet. 88 ग्रहों में 26 वें ग्रह का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूर्त–Muurt. Sensually acceptable matters, Corporeal, tangible. जो पदार्थ जीवो के इन्द्रियग्राह्रा विषय है व मूर्त है अथवा रूप, रस आदि गुणों का पिण्ड मूर्त है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावग्रंथ – Bhavagramtha. Internal attachment. अंतरंग परिग्रह; मिथ्यात्व आदि इसके १४ भेद हैं “
एक संख्या A number i.e. 1. एक संख्या को नोकृति कहते हैं क्योंकि इसका वर्ग करके मूल में से घटाने पर वृद्धि नहीं होती बल्कि मूल संख्या ही नष्ट हो जाती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दुर्भग नामकर्म प्रकृति A Karmic nature pertaining to unfortune (reg. awkward body). दुर्भाग्य से संबधित एक कर्म प्रकृति, जिसके उदय से बेडौल , कुरूप शरीर प्रापत होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वार्तिकाकर्म – Vaartikaakarma.: Polishing or Varnishing. वस्तु तैयार करके उस पर पॅालिश आदि कर दी जाती है यही वार्तिक कर्म है “