बाह्य तप: कर्म!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य तप: कर्म – Bahya Tapah Karma. A type of penance or austerity (external). तप: कर्म का एक उपभेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य तप: कर्म – Bahya Tapah Karma. A type of penance or austerity (external). तप: कर्म का एक उपभेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वन्हि – Vanhi.: Fire,A special type of heavenly deities (Laukantik). अग्नि ,ब्रह्मलोक निवासी लौकांतिक देवों का भेद “
उपेक्षणीय What is to be ignored, negligible . उपेक्षा करने योग्य वस्तु।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सोमवंश – Somavansha. Another name of Chandravansh ( a dynasty) initiated from theson of Lord Bahubali. चन्द्रवंश । देखें – सोमयश । सोमवंश को ऋषिवंश भी कहते है।
उष्ण परीषह Heat thermal affliction . 22 परीषह में एक परीषह, ग्रीष्मकाल में उपवास आदि के कारण उत्पन्न दाह से पीडि़त होने पर प्रतिकार के बिना समतापूर्वक सहन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रसलोक Name of a particular universe (middle universe). सुमेरू पर्वत के मूल से एक राजू लम्बे चैडे क्षेत्र में तिर्यक् त्रसलोक स्थित है, इसे मध्यलोक भी कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वल्लिभूमि – Vallibhoomi. The third land of Samavsharan (assembly of Lord). समवशरण की तीसरी भूमि ;अपरनाम लताभूमि ,यह अनेकों क्रीड़ा पर्वतों व वापिकाओं आगि शोभित है “
देशप्रत्यासत्ति A cause of bonding or co-relation of two matters or elements. संयोग का एक भेद ; दो द्रव्यों के अवयवों का सम्बद्ध रहना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्धमानसागर (आचार्य) – Vardhamaanasagar (Aachaarya).: Name of a Digamber Jain Acharya, the disciple of Acharya Dharmasagar Maharaj in the tradition of Charitra Chakravarti Acharya Shri Shantisagar ji Maharaj. चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की परम्परा के एक वर्तमान आचार्य “इन्होंने सन् 1967 में पूज्य गणिनी श्री ज्ञानमती माताजी की प्रेरणा से गृहत्याग…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समरंभ-प्रमादी जीवों का प्राणों की हिंसा आदि कार्य में प्रयत्नशील होना समरंभ है”