संघातन कृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघातन कृति – Sanghaatana Kriti. Assimilation of molecules of body. पांचो शरीरों में से विवक्षित शरीर के परमाणुओं का निर्जरा के बिना जो संचय होता है उसे संघातन कृति कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघातन कृति – Sanghaatana Kriti. Assimilation of molecules of body. पांचो शरीरों में से विवक्षित शरीर के परमाणुओं का निर्जरा के बिना जो संचय होता है उसे संघातन कृति कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बाधारहित- सुख; दु:ख तकलीफ आदि का न होना। रुकावअ से रहित होना। Badharahita- Obstacle free, free from hinderences
द्विचारित्रसिद्ध The soul who gets salvation through two types of super conducts (in accordance with Bhutpragyapana Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो चारित्र से सिद्ध होने वाले जीव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
अयोग A time unit. आत्मा के प्रदेशों का सकंप न होना-कर्म-नोकर्म आकर्षण के लिए जीव कीय ओग्य शक्ति का न चलना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्वात्रिंशतिका Name of a prayer written by Amitgati Acharya. आचार्य अमितगति द्वारा रचित 32 श्लोक वाला सामायिक पाठ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिगंतर गति Unnatural movement of soul. जीव की विभाव गति अर्थात् कर्म वश नीचे, तिरछे, और ऊपर गति करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्तरभाद्रपद नक्षत्र Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावि भूत उपचार – Bhavi Bhuta Upachar. Wrong implication of something in past time which is going to occure in future. भविष्य में होने वाले कार्य का भूत में आरोप करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर- स्थूल, स्कन्ध, एक प्रकार का नाम कर्म। Badara- Gross, A type of Karma
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतृरागता –Vitaragata. State of passionlessness, Freeness from worldly attachment.” सच्चे आप्त (भगवान) के तीन मुख्य गुणों सर्वज्ञंता, वीतरागता तथा हितोपदेशिता में से एक गुण ” जिसमें राग, द्वेष एवं मोह का अभाव होता है “