द्विज्ञानसिद्ध!
द्विज्ञानसिद्ध The soul who gets salvation by two types of super knowledges (in accordance with Bhutpragyapan Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो ज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्विज्ञानसिद्ध The soul who gets salvation by two types of super knowledges (in accordance with Bhutpragyapan Naya). भूतप्रज्ञापन नय की अपेक्षा दो ज्ञान से सिद्ध होने वाले जीव।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शरीरत्रिक – Sahreeratrika. A triplet related to body. औदारिक, वैक्रियिक, आहारक शरीर “
द्वादशंग Twelve parts of scriptural knowledge. श्रुत के 12 अंग ; द्रव्यश्रुत रूप की रचना गणधर करते हैं इसे ही जिनवाणी कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आलेख्याकार Painting with realness. चित्रकारी-केवलज्ञान में चित्रपट के समान तीनों काल की वस्तुएं चित्र के समान (आलेख्याकार) साक्षात भाषित होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक समुदघात –VaikriyikaSamudghata Overflowing of soul points from the body for transforming the own shape. विक्रिया करने के लिय अथार्त शरीर को छोटा, बड़ा या अन्य शरीर रूप करने के लिय आत्मा के प्रदेश शरीर से बाहर निकलते हैं वह वैक्रियिक समुदघात हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्यतो द्रष्ट – Saamaanyato Drashta. General anticipation or apprehension for something. स्वार्थानुमान के तीन भेदों में एक भेद । जो सामान्य रूप से लिंग को देखकर लिंगी का अनुमान किया जाता है वह सामान्यतो दृष्ट है।
आतपन Fourth layer (Patal) of the third hell. तीसरे नरक का चैथा पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सामान्य गृह – Saamaanya Grha. Home, An aboding palace of deities. भवनवासी देवों के भवन का एक गृह (देवों के भवन सामान्यगृह, गर्भगृह, आसनगृह, लतागृह इत्यादि गृह विषेषों से सहित होते है) ।
ऋद्धीश 13th Patal (layer) of Saudharma heaven. सौधर्म स्वर्ग का 13 वाँ पटल।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धिसार – आचर्य नेमेचन्द्र सिद्धान्त चक्रवर्ती द्वारा रचित मोहनीय कर्म के उपषम विशयक 391 गाथा प्रमाण प्राकृत गाथाबद्ध ग्रंथ। Labdhisara-Name of a great jaina scripture written by Acharya Nemichandra Siddhant Chakrvarti