रूप्यवर!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूप्यवर – मध्यलोक के अन्तिम 16 द्वीपों में दषवां द्वीप व समुद्र। Rupyavara-name of an island & an ocean of middle universe
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूप्यवर – मध्यलोक के अन्तिम 16 द्वीपों में दषवां द्वीप व समुद्र। Rupyavara-name of an island & an ocean of middle universe
चारित्रपंडित Noble and learned person having good conduct. सामायिक छेदोपस्थापना आदि पांच प्रकार के चारित्र के धारक मुनि ।।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पृहा – Sprhaa. Longing, intention, desire.वांछा, इच्छा, कामना, अभिलाषा।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विसदृश –Visadrsa. Dissimilar, Recognition with dis-similarity (reg. any different matters). समानता का अभाव ” प्रत्यभिज्ञान का एक भेद; स्मृति और प्रत्यक्ष के विषयभूत पदार्थों में विसदृशता दिखाते हुये जोड़रूप ज्ञान को विसदृश प्रत्यभिज्ञान कहते हैं ” जैसे – गाय को लेकर भैंसा में रहने वाली विसदृशता दिखाना “
छक्कमुवष्स Name of a treatise pertaining to mundane activities. गृहस्थ षट्कर्म विषयक एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष नाम कर्म प्रकृति – Sparssana Naama Karma Prakrti. Physique making karmic nature causing sense of touch in the body.उत्पन्न कर्म के उदय से शरीर मे ठंड, गरम आदि स्पर्ष का ज्ञान उत्पन्न होता है उसे स्पर्ष नाम कर्म प्रकृति कहते है। इसके स्निग्ध, रुक्ष, मृदु, कठोर, शीत, उष्ण, हल्का और भारी 8 भेद…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यक्त्तनिर्वृत्त्यक्षर–Vyaktanirvrttyaksara. Power of pronouncing words possessed by five sensed beings. निर्वृत्त्यक्षरके दो भेदों में एक भेद; यह संज्ञी पंचेन्दिर्य पर्याप्तक तक के होता हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वाभिमुख – Purvabhimukha. See- Purvamukha. देंखें – पूर्वमुख “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविषेण – वि सं 734 में पùपुराण के रचियता एक आचार्य। Ravisena- name of an Acharya who wrote Jain Ramayan called as ‘Padmapuarn’