देवत्व!
देवत्व State of Godness. परमात्मपना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आस्रवानुप्रेक्षा Contemplation of soul (as it is free from influx of all Karmas). निरन्तर आत्मा को द्रव्यरूप और भावरूप दोनों प्रकार के आस्रवों से रहित चिन्तवन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जल व्रत – Nirjala Varta. A vow (fasting) even without taking water. उपवास; जल का भी त्याग कर उपवास रखना ” हर व्रत को करने में उत्कृष्ट विधि निर्जल व्रत (उपवास) की होती है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरूपभोग – Nirupabhoga. Devoid of worldly enjoyments. उपभोग रहित होना-तैजसऔर कार्माण शरीर की भॉति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविवीर्य – चक्रवर्ती भरतेष का पुत्र, इसने जयकुमार के साथ तीर्थकर र्वशभदेव से दीक्षा ली थी। Ravivirya-the son of Chakravarti (emperor) of Bhartesh
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकुलता – Nirakulataa. Calmness, Peace of mind, Unperturbedness. सुख अर्थात् आकुलता से रहित होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगदु प्रणिधान – सामायिक षिक्षाव्रत का एक अतिचार, मन वचन काय की दुश्ट प्रवृत्ति। Yogaduhpranidhana-bad tendencies or attitude of one (an infraction of samayik)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुवर्ण – Suvarna. A good colour, Golden, Gold, Name of a summit and a deity of Shikri mountain. अच्छा वर्ण, सुनहरा, सोना, तौल का एक प्रमाण, 2.5 धरण = 1 सुवर्ण या 1 कंस, षिखरी पर्वत का एक कूट तथा देव, अपरनाम कांचन ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरपेक्ष –Nirapeksha. Without expectation, independent. स्वतंत्र; किसी दूसरे की अपेक्षा न रखने वाला, जैसे- केवलज्ञान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यायु कर्म प्रकृति- Manushyaayu Karma Prakrti. Karmic nature causing human body. जिस कर्म के उदय से जीव मनुष्य देह में रहे “