सूत्रकृतांग!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रकृतांग – Sutrakritaanga. A part of scriptural knowledge containing 36,000 stanzas reg. description of soul. द्वादशांग श्रुत का दूसरा भेद । इसमें हजार पद है, जिनमे स्वसमय और परसमय का वर्णन किया गया है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्रकृतांग – Sutrakritaanga. A part of scriptural knowledge containing 36,000 stanzas reg. description of soul. द्वादशांग श्रुत का दूसरा भेद । इसमें हजार पद है, जिनमे स्वसमय और परसमय का वर्णन किया गया है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विदिशा – Vidisha. Subdirections, quarter parts of the four direc- tions. चारों दिशाओं के अतिरिक्त प्रत्येक दो दिशाओं के मध्य स्थित दिशाएँ – ईशान, आग्रेय, नैऋत्य, वायव्य, ये ४ विदिशाएं कहलाती हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूची – Suchee. Width. Diameter or dadius pertaining to island or ocean. व्यास या बाण, किसी द्वीप या समुद्र की परिधि (गोलाई) के एक तट से दूसरे तट की चैडाई को सूची कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्यून – Nyoona. Deficient, Lacking, Wanting. कम किया हुआ, घटाया या छोटा किया हुआ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वापर विरोध – Purvapara Virodha. State of mutual contradiction. पूर्व और उत्तर समय अर्थात् परस्पर में विरोध होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म निगोद वर्गणा – Sukshma Nigoda Varganaa. A type of aggregate of Karmic molecules. 23 प्रकार की वर्गणाओं का एक भेद ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भवविपाकी प्रक्रति – Bhavavipaki Prakrti. Maturity of Karmic nature causing different kinds of life courses (body forms). जिन कर्मो का फल मनुष्य आदि भव के रूप में होता है वे भव विपाकी प्रक्रति कहलाती हैं ” चारों आयु भव विपाकी हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा मुक्ति Salvation after one or two births.एक दो आदि भवों के अनंतर मुक्ति होना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभ्य – Vibhya. An infraction of paying reverence (reverence due to influence of Acharya etc.). वंदना का एक अतिचार, आचार्य आदि के भय से वंदना करना “