चतुरस्त्र!
चतुरस्त्र Quadrilateral. चर्तुभुज अर्थात् चार भुजाओं वाला ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आहवनीय A sacred fire in which funeral ceremony of Gandhars is performed. अग्नि वह अग्नि जिसमें गणधरों के शरीर का अग्नि संस्कार किया जाता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्धन – Nirdhana. Pauper, poor, needy. ग़रीब, धनहीन व्यक्ति “
त्रैविद्यदेव Title for some Acharyas in Nandi sangh (group) etc. कतिपय आचार्यों की उपाधि जैसे नन्दि संघ के देशीयगण की गुर्वावली के अनुसार पाँच आचार्यों की उपाधि, कातंत्र रूपमाला व्याकरण के भावसेन – त्रैविद्य टीकाकार आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाह्य करण – Bahya Karana. External cause causing certainty for the comple-tion of any work. कार्य सिध्द में साधकतम बाह्य निमित जिसके होने पर कार्य की सिध्द निशिचत होती है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रामपुत्र – भगवान महावीर के तीर्थ में हंुए 10 अन्तकृत कंेवलियों में चैथंे केचली। Ramaputra-Name of an omniscient of the assembly of lord Mahavira
उत्पन्न स्थान सत्तव Reforming of Karmas by reducing Karmic Sthiti. पूर्व पर्याय में जो उद्वेलना व बिना उद्वेलना से सत्तव हुआ है उसका उत्तर पर्याय में उत्पन्न होना। वहाँ उत्तर पर्याय में उस सत्तव को उत्पन्न स्थान में सत्तव कहा है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरास्रव – Niraasrava. Devoid of attachments, ill-feelings etc. सम्यग्दृष्टि जीव अर्थात् राग, द्वेष और मोह से रहित होना निरास्रव कहलाता है “
चतुरावश्यक Four super necessities of the 7th stage of spiritual development. अनंतगुणी विशुद्धि , अप्रशास्ता प्रकृतियों की अनंतगुणी हानि, प्रशस्त प्रकृतियों में अनंतगुणी वृद्धि , स्थिति बंधापसरन ये ४ आवश्यक कार्य अधःप्रवृत्तकरण संयत अर्थात् सप्तम गुणस्थानवर्ती मुनि के होते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]