ह!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]ह – Ha. The thirty-third consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का तैतीसवाॅ व्यंजन, इनका उच्चारण स्थान कण्ठ है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]ह – Ha. The thirty-third consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का तैतीसवाॅ व्यंजन, इनका उच्चारण स्थान कण्ठ है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परदातृव्यपदेश:An infraction of vow of hospitality to donate indirectly and deceitfully.अतिथिसंविभाग व्रत का एक अतिचार पात्र को स्वयं दान न कर दूसरे से कहकर दिलवाना या दूसरे की वस्तु लाकर देना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाभाविक शक्ति – ैअंइींअपां ैंाजपण् छंजनतंस चवूमत वत ेजतमदहजी पद जीम दंजनतम व िउंजजमतण् द्रव्य के स्वभावो मे स्वाभाविकी शक्ति होती है। देखे- स्वाभाविक क्रिया।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वहिंसा – Svahimsaa. Passionate feelings as volitional violence. भावहिंसा-प्रमाद से युक्त आत्मा पहिले स्वंय अपने द्वारा ही अपना द्यात करता है अर्थात् रागादि प्रमाण भाव ही स्वहिंसा है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्न – हीरा, मोती आदि मणियों, चक्रवर्ती के यहां स्वयंमेव प्रकठ होने वाली उसके भोगोभोग की सामग्री, ये सात सजीव व 7 अजीव कुल 14 वस्तुएं होती है, इन्हें 14 रत्न भी कहा जाता है, रूचक पर्वत पर स्थित एक कूट Ratna- Jewels , 14 particular splendorous (of chakrvarti etc.) Name of a summit…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांपरायिक आस्त्रव – Saamparaayika Aasrava. Passionful influx. स्वामी की अपेक्षा आस्त्रव के दो भेदो मे एक भेद। कषाय सहित होने वाले आस्त्रव को साम्परायिक आस्त्रव कहते हैं पहले से दसवें गुणस्थान तक सांपरायिक तक सांपरायिक आस्त्रव होता है। इसके 57 भेद है- 5 मिथ्यात्व, 5 अविरति, 15 प्रमाद, 25 कषाय, 7 योग।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यान – नाना प्रकार के भाण्डो से आपूरित होकर भी समुद्र में गमन करने में समर्थ जो जहाज होते है वे यान कहलाते है देवो का एक वाहन। Yana-Ship, Aircraft, A kind of conveyance of deities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठासार संग्रह- एक प्रतिश्ठा सम्बन्धी ग्रंथ का नाम। pratisthasara samgraha – name of ritual treatise