भाव इंद्रिय!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव इंद्रिय – Bhava Imdriya. Psychical sense. लब्धि और उपयोग रूप भावेन्द्रीय हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव इंद्रिय – Bhava Imdriya. Psychical sense. लब्धि और उपयोग रूप भावेन्द्रीय हैं “
तृष्णा – वशीकरण Overpowering on all hopes and desires. स्वयं आशाओं का दास न बनते हुए आशाओं को अपना दासी बना लेना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
तूष्णीक Devil; a type of peripatetic deities. पिशाच जातीय व्यंतर देवों का एक भेद। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वींद्रिय जाति नामकर्म A Karmic nature causing birth in the form of two sensed beings. वह कर्म प्रकृति जिसमें द्वींद्रिय जाति प्राप्त हो जैसे- शंख, सीप इत्यादि।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीधर्म – Shreedharma. Past-birth soul of Lord Munisuvrata. तीर्थंकर मुनिसुव्रत के पूर्व भव का जीव “
उग्रोग्रतप A type of supernatural power (of fasting with mental control in increasing order). उग्र तप ऋदि का एक भेद-जीवन पर्यंत तीन गुप्ति रक्षित होकर एक-एक दिन अधिक वृद्धि के साथ उपवास करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रावकाचार सारोद्धार – Shraavakaachaara Saaroddhaara. Name of a book written in Sanskrit language. संस्कृत भाषाबद्ध एक ग्रंथ “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संश्लेष बंध – Sanshlesa Bandha. Something combined or synthesised. जो परस्पर संश्लेष को प्राप्त हुए काष्ठ और लाख का बंध होता है वह संश्लेष बंध है “
त्रि मकार Wine, meat, honey (the three inedible things). मदिरा, मास, मधु। तीन न खाने योग्य पदार्थ जिनका प्रारंभ ‘म’ शब्द से है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]