चतुरिन्द्रिय!
चतुरिन्द्रिय Four – sensed beings. स्पर्शन , रसना , घ्राण , चक्षु ये ४ इन्द्रियाँ जिन जीवों के होती हैं वे चतुरिन्द्रिय जीव हैं . जैसे -मक्खी , मच्छर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुरिन्द्रिय Four – sensed beings. स्पर्शन , रसना , घ्राण , चक्षु ये ४ इन्द्रियाँ जिन जीवों के होती हैं वे चतुरिन्द्रिय जीव हैं . जैसे -मक्खी , मच्छर आदि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
थावर प्रतिमा Stable image of any thing. व्यवहार से चंदन, कनक, महामणि, स्फटिक आदि से बनी प्रतिमा थावर कहलाती है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर सांपरायिक बंधक- निक्षेप की अपेक्षा बंधक का एक भेद। Badara Samparayika Bamdhaka- A type of karmic binder
त्रैराशिकवाद Doctrine related to the conception of trio thoughts (like Jiva, Ajiva, Jiva-ajiva etc.). सर्व वस्तुओं को त्रयात्मक मानना अर्थात् तीन राशियों द्वारा चरण करने का सिद्धान्त जैसे जीव, अजीव , जीवाजीव, लोक , अलोक लोकालोक आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संघात – Sanghaata. Aggregate, Collection, A type of Shrutgyan (scriptual knowledge) related to wholesome increase of knowledge. समूह, जमाव, श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 7वां भेद; एक-एक पद के अक्षर की वृद्धि के क्रम से संख्यात हजार पदों के बढ़ जाने पर यह संघात श्रुतज्ञान होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादर दोष- साधु संबंधी आहार के एक दोष प्राभृत का उपभेद; दिन, महीना आदि को बदलकर आहार दान देना। Badara dosha- A fault of food related to Jaina saint
त्रिवेदसिद्ध Beings salvated from all genders (in accordance with Bhavved). भाववेद की अपेक्षा जो तीनों वेदों से सिद्ध होते हैं त्रिवेदसिद्ध कहलाते है । द्रव्य से पुरूष वेदी, भाव से स्त्री वेदी एंव नपुंसक वेदी भी सिद्ध पद को प्राप्त कर सकते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संग्रह कृष्टि – Sangraha Krshti. A kind of gradual destruction of passions. कृष्टियों के अनेक भेदों में एक भेद ” क्रोधादि संज्वलन कषायों की जो 12,9,6 और 3 कृष्टियां होती है वे ही संग्रह कृष्टियां हैं ” पुनः इस एक-एक संग्रह कृष्टि की अंतर कृष्टियां अनंत होती हैं ” क्योंकि अनंत कृष्टियों के समूह…
दिक्पालबलि शुद्धि A particular kind of obstacle removing ritual activity to be observed in Panchkalyanak Pratishtha with three cirumabulation of Mandap & auspicious offerings. दशदिक्पालों की पूजा, पंचकल्याण प्रतिष्ठा आदि महान अनुष्ठान कार्यों में विघ्नों को दूर करने के लिए मंदिर या मण्डप की तीन प्रदक्षिणा देते हुए विशेष नैवेद्य आदि को अर्पण करते हुए…