धृत धर्मा!
धृत धर्मा A king of Kuru dynasty. राजा धृतव्यास के पश्चात् हुआ एक कुरुवंशी राजा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
धृत धर्मा A king of Kuru dynasty. राजा धृतव्यास के पश्चात् हुआ एक कुरुवंशी राजा । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्बाध – Nirbaadha. Uncontradicted, Unrestricted. बाधा रहित “
धारावाहिक ज्ञान Continuous contemplation of anything. किसी विषय विशेष का श्रृंखलाबद्ध ज्ञान। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
आस्रवानुप्रेक्षा Contemplation of soul (as it is free from influx of all Karmas). निरन्तर आत्मा को द्रव्यरूप और भावरूप दोनों प्रकार के आस्रवों से रहित चिन्तवन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्जल व्रत – Nirjala Varta. A vow (fasting) even without taking water. उपवास; जल का भी त्याग कर उपवास रखना ” हर व्रत को करने में उत्कृष्ट विधि निर्जल व्रत (उपवास) की होती है”
धातकीखंडसिद्ध Beings who get salvation from Dhatkikhand (island). धातकीखंड द्वीप से सिद्ध होने वाले जीव। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरूपभोग – Nirupabhoga. Devoid of worldly enjoyments. उपभोग रहित होना-तैजसऔर कार्माण शरीर की भॉति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निराकुलता – Nirakulataa. Calmness, Peace of mind, Unperturbedness. सुख अर्थात् आकुलता से रहित होना “
धर्मशर्माभ्युदय Name of two books (1) written by poet Asag (2) written by poet Harichand. कवि असग (ई. 988) कृत धर्मनाथ तीर्थंकर चरित, कवि हरिचन्द (ई. 10 का मध्य) कृत एक संस्कृत काव्य। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]