हंस साधु!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हंस साधु – Hammsa Saadhu. A type of false saints of Vedant philosophy. एक प्रकार के वेदांती साधु, जो दोषो से युक्त होते है, कषाय वस्त्र धारण करते है एवं दण्ड रखते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हंस साधु – Hammsa Saadhu. A type of false saints of Vedant philosophy. एक प्रकार के वेदांती साधु, जो दोषो से युक्त होते है, कषाय वस्त्र धारण करते है एवं दण्ड रखते है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पर निमिक्तक उत्पाद :A kind of origination.उत्पाद के दो भेदों में एक भेद, परप्रत्यय उत्पाद ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्तामर कथा – Bhaktamara Katha. Name of tales written by Pandit Raymallaji and Jaichand Chhabda. पं. रायमल्ल (ई. १६१०) एंव पं. जयचन्द छाबड़ा (ई. १८१३) द्वारा रचित कथा “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वार्थी – Svaarthii. One engrossed in self, selfish one, one of the 88 planets. आध्यात्मिक व्याख्या के अनुसार आत्महित मे संलग्न रहने वाले को स्वार्थी कहते है। क्षुद्र मनुष्य जो अपना कार्य करने मे ही तत्पर रहते है उन्हें स्वार्थी कहा गया है, जैसे मेद्य परोपकारी है और बड़वानल स्वार्थी है। 88 ग्रहो…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] Supreme soul. संसारी जीवो मे से जो उत्कृष्ट आत्मा बन जाती है उसे परात्मा कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] म्रदु भाषण–Mradu Bhashan. Soft and sweet speech. मधुर एवं विनम्र वचन या उपदेश, भाषा समिति; प्रिय, मधुर या हितकारी वचनों का प्रयोग करना”
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाधीन सुख – Svaadhiina Sukha. Supreme bliss. स्ंसार के समस्त विषय-कषायोे की रहितता से प्राप्त सुख। यह सुख सिद्वो मे पूर्णतः प्रगट होता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पद्मपुरा (तीर्थ) : Name of Digambar Jain Atishay Kshetra (a place of pilgrimage) near jaipur (raj). The miraculous idol of Lord Pamaprabhau is installed here. राजस्थान में जयपुर के नजदीक स्थित एक दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र । जहाॅं भगवान पदमप्रभु की चमत्कारिक प्रतिमा विराजमान है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनसिज- Manasija. Kamdev – those having the most lustrous & attractive body. कामदेव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साकांक्ष अनशन – Saakaanksha Anasana. A type of austerity (fasting) to be observed for some specific time periods. अवधृत काल अनषन तप अर्थात् नियतकालीन उपवास। इसके शष्टम, अष्टम, द्वादष, पंद्रह दिन, एक मास, कनकावली, मुरज, सिंहनिष्क्रीडित इत्यादि जो भेद जहाॅ है, वह सब साकांक्ष अनशन तप है।