ऋतुविहीन फलोत्पत्ति!
ऋतुविहीन फलोत्पत्ति One of the super-natural happening of Tirthankars (Jaina-Lords), Unseasonal blossoming. तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में देवकृत अतिशय-असमय में फूल-फूलों का वृद्धिंगत हो जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ऋतुविहीन फलोत्पत्ति One of the super-natural happening of Tirthankars (Jaina-Lords), Unseasonal blossoming. तीर्थंकरों के 34 अतिशयों में देवकृत अतिशय-असमय में फूल-फूलों का वृद्धिंगत हो जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाटी संहिता – श्रावकाचार विशयक पडित राजमल्ल कृत ग्रथ इसमें सात सर्ग एवं 1400 ष्लोक हैं। Lati Samhita-Name of a treatise written by Pandit rajmalla
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साध्य – Saadhya. Something attainable or to be achieved. इष्ट, अबाधित, असिद्ध को साध्य कहते है (देखें -परीक्षामुख) ।
ऋजुकूला Name of the river on the bank of which Lord Mahavira attained omniscience. जिस नदी के किनारे भगवान महावीर को केवलज्ञान प्राप्त हुआ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्रवसंत व्रत – क्रमष 2,3,4,5,6,6,4,3,2 इस प्रकार 35 उपवास करना।बीच के स्थानो में पारणा व नमस्कार मंत्र की त्रिकाल जाप करना। Rudravasamta Vrata-A specified procedural vow (fasting)
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमावस्था:State of salvation.निश्चय मोक्षमार्ग का अपरनाम । सिद्वावस्था
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधर्म्य – Saadharmya. Parallelism, Means showing some existence. धर्म, गुण आदि की समानता । साध्य के आधार में जिसकी वृत्तिता निष्चित हो उसको साधर्म्य कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संशय – Sanshaya. Doubt, Suspicion, Confusion. वस्तु के विषय में विरुद्ध अनेक धर्मों में से किसी एक का निश्चय नहीं कर पाना और संदेह में पड़ जाना ” जैसे- यह सीप है या चाँदी है ऐसा संदेह होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातिशय केवली – Saatisaya Kevale. A type of omniscient one. तीर्थकर प्रकृति रहित, 25 अतिशयो (केवलज्ञान, 14 देवकृत, 1 वज्रवृषभनाराच संहन), 4 प्रातिहार्य (छत्र, सिंहासन, भामंडल, दिव्यध्वनि), गन्धकुटी व अनन्त चतुष्टष् सहित सातिशय केवली होते है। अर्थात् अतिशय युक्त केवली को सातिशय केवली कहते है।